ईरान जंग के बीच एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव
केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 21 दिन के बजाय 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का कदम
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सरकार ने यह कदम गैस की जमाखोरी रोकने और सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया है। पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि जरूरत न होने पर भी लोग सिलेंडर बुक करके स्टॉक कर रहे थे। सरकार का मानना है कि वेटिंग पीरियड को 25 दिन करने से बेवजह की बुकिंग पर लगाम लगेगी, जिससे उन लोगों को आसानी से सिलेंडर मिल सकेगा जिन्हें वास्तव में जरूरत है। तेल कंपनियों ने शुक्रवार को ही 21 दिन का नियम लागू किया था, जिसे बढ़ाकर अब 25 दिन कर दिया गया है। इससे पहले बुकिंग को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं था।
हाल ही में बढ़े थे गैस सिलेंडर के दाम
इस बदलाव से दो दिन पहले ही सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की थी। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का एलपीजी गैस सिलेंडर अब 913 रुपए का मिल रहा है, जो पहले 853 रुपए का था। वहीं, 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है, जिसकी कीमत अब 1883 रुपए हो गई है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं। इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। यह बढ़ोतरी लगभग एक साल बाद की गई है। सरकार ने यह बढ़ोतरी ऐसे समय की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस की किल्लत की आशंका जताई गई थी।
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक
रसोई गैस के घटते स्टॉक को देखते हुए राजस्थान और पंजाब में तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर अघोषित रोक लगा दी है। एजेंसियों को मैसेज करके कॉमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर नहीं लगाने के आदेश दिए गए हैं। कंपनियों ने देर रात ये निर्देश जारी किए हैं कि केवल घरेलू उपयोग के सिलेंडर की डिलीवरी पर ही फोकस किया जाए। पंजाब में भी एलपीजी के कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है और यहां की एजेंसियों को 19 किलो वाले गैस सिलेंडर की दो दिनों से सप्लाई नहीं मिली है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, ईंधन की कोई कमी नहीं
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं जाती। वर्तमान अनुमानों के मुताबिक, कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने की उम्मीद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है। भविष्य के किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए भारत ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के अलावा अन्य रास्तों से कच्चे तेल की सोर्सिंग तेज कर दी है, ताकि समुद्री मार्ग में किसी भी तनाव की स्थिति में सप्लाई में रुकावट न आए।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल का पर्याप्त स्टॉक, भारत की तैयारी से अन्य देश प्रभावित
विमानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का भी देश के पास पर्याप्त स्टॉक है, और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि भारत न केवल ATF का उत्पादक है, बल्कि इसका निर्यात भी करता है, इसलिए विमान सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एनर्जी मैनेजमेंट के मामले में भारत दुनिया के कई अन्य देशों से बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की तैयारी को देखते हुए कई देशों ने नई दिल्ली से संपर्क साधा है। वे भारत के स्टॉक मैनेजमेंट और सप्लाई चेन की रणनीति को समझना चाहते हैं।
ईरान जंग से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। हाल ही में कारोबार के दौरान यह 25% बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, हालांकि बाद में यह थोड़ा नीचे आकर 105 डॉलर के करीब आ गया। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकला था।
Sachin Saxena