ईरान जंग में ट्रम्प अकेले पड़े: नाटो ने होर्मुज स्ट्रेट में मदद से किया इनकार

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ईरान  जंग  में  ट्रम्प अकेले  पड़े: नाटो ने होर्मुज स्ट्रेट में मदद से किया इनकार

ईरान युद्ध में ट्रम्प को नहीं मिला नाटो का साथ, होर्मुज में मदद से किया इनकार

ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद को अकेला पा रहे हैं। उनके सहयोगी नाटो देशों ने होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता खुलवाने में सैन्य मदद देने से साफ इनकार कर दिया है। यह स्थिति तब बनी जब ईरान ने तेल आपूर्ति रोककर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचाई और ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर नाटो देश इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद नहीं करते, तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है।

नाटो देशों का इनकार और कूटनीति पर जोर

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी ने इस मामले में किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि यह यूरोप की जंग नहीं है और ईरान की मौजूदा सरकार को बमबारी से झुकाना सही तरीका नहीं है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने अमेरिका की नौसेना की ताकत पर सवाल उठाते हुए यूरोपीय जहाजों के योगदान को नगण्य बताया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी अपने देश के इस बड़े युद्ध में न फंसने की बात कही। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना जरूरी माना, लेकिन कहा कि यह आसान काम नहीं है और कोई भी कदम ज्यादा से ज्यादा देशों की सहमति से ही उठाया जाएगा।

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने संकट का हल बातचीत से निकालने पर जोर दिया और नौसैनिक मिशन को बढ़ाने के पक्ष में नहीं दिखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय यूनियन के मौजूदा मिशन समुद्री डकैती रोकने और रक्षा के लिए हैं, उन्हें युद्ध में नहीं बदला जा सकता।

ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने भी अपने रेड सी मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने की ट्रम्प की अपील ठुकरा दी, क्योंकि मिशन का दायरा बढ़ाने की कोई इच्छा नहीं थी। यूरोपीय देश अमेरिका और इजराइल के युद्ध के मकसद और आगे की योजना को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं।

इजराइल की सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी

इस बीच, इजराइल ने ईरान के कई शहरों जैसे तेहरान, शिराज और तबरीज में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजराइल का दावा है कि उसने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ा एक विमान भी नष्ट कर दिया। इजराइली सेना ने अगले तीन सप्ताह तक लड़ने की योजना तैयार होने की बात कही है और आगे के लिए भी अलग योजनाएं बनाई हैं। इन अभियानों का मकसद ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिनसे वह इजराइल के लिए खतरा पैदा कर सकता है, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकाने और सुरक्षा तंत्र शामिल हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर युद्ध खत्म होगा तो इस तरह खत्म होना चाहिए कि दुश्मन दोबारा हमला करने की हिम्मत न करे। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना जमीन पर उतरी, तो उसे वियतनाम जैसा अंजाम भुगतना पड़ सकता है।

इस संघर्ष में अमेरिका के करीब 200 सैनिक घायल हुए और 13 सैनिकों की मौत हुई है। वहीं, ईरान में अब तक 1,800 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक हैं। इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हिजबुल्लाह के खिलाफ जमीनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है, जिससे लेबनान में अब तक 850 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल हैं। जर्मनी ने लेबनान में जमीनी हमले को गलती बताते हुए मानवीय स्थिति बिगड़ने की चेतावनी दी है।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट: ईरान की सत्ता मजबूत, ट्रम्प जल्द खत्म कर सकते हैं ऑपरेशन

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल द्वारा लगातार दो हफ्ते से एयरस्ट्राइक किए जाने के बावजूद ईरान की सत्ता अभी भी काफी मजबूत है और उसके जल्द गिरने का कोई खतरा नहीं है। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति में नहीं है और वह देश की जनता पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है।

तेल की कीमतों में इजाफे की वजह से बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द जंग खत्म कर सकता है। हालांकि, अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता सत्ता में बने रहते हैं तो युद्ध खत्म करने का रास्ता निकालना आसान नहीं होगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जो फिलहाल ईरान के कारण प्रभावित हो रहा है।

Janmejay Chaturvedi