इंदौर हाईकोर्ट में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर आज अहम सुनवाई

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इंदौर हाईकोर्ट में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर आज अहम सुनवाई

इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी मामला: हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई

मध्यप्रदेश के इंदौर में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से जुड़ी मौतों के मामलों पर दायर जनहित याचिकाओं पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले में अब तक 28 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है, जिसको लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

पिछली सुनवाई में अदालत के सख्त सवाल

20 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने करीब डेढ़ घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं। शासन की ओर से घटना का कारण पुलिस चौकी के टॉयलेट को बताया गया था, लेकिन अदालत ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या केवल इससे पानी इतना दूषित हो सकता है कि जानें चली जाएं, और क्या पानी में किसी केमिकल के मिलाने की संभावना की जांच हुई है। लंबी बहस के बावजूद मौतों का कोई ठोस और अंतिम कारण अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका।

मौतों पर विवाद और परिजनों का विरोध

भागीरथपुरा में हाल की मौतों में कांग्रेस नेता राजाराम बोरासी का नाम भी शामिल है। उनकी मौत के बाद परिजनों ने दावा किया कि यह गंदे पानी की वजह से हुई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत उनकी मेडिकल रिपोर्ट जारी कर इसे दूषित पानी से हुई मौत मानने से इनकार कर दिया। इसी तरह इससे पहले सुभद्राबाई, विद्या बाई, हेमंत गायकवाड़ और बद्री प्रसाद की मौतों को भी विभाग और प्रशासन ने डायरिया से हुई मौत मानने से इंकार किया था।

राजाराम बोरासी की मौत के विरोध में परिजनों ने 24 जनवरी को अर्थी रखकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी भी भागीरथपुरा पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अलग से, बद्री प्रसाद की मौत के बाद परिजनों ने भागीरथपुरा पुल के पास शव रखकर चक्काजाम किया और स्थानीय भाजपा पार्षद कमल वाघेला के खिलाफ नारेबाजी की।

दूषित पानी की संभावित वजहों पर बहस

पिछली सुनवाई में शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस चौकी के टॉयलेट के अलावा यह भी एक कारण हो सकता है कि बोरवेल का पानी दूषित पाया गया, जो मेन वाटर लाइन में मिल गया। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने दलील दी कि भागीरथपुरा कान्ह नदी के किनारे स्थित है, और यहां से दूषित पानी बोरिंग में गया, फिर सीवरेज लाइन और नर्मदा लाइन में घुलकर सप्लाई में शामिल हो गया, जिससे यह स्थिति बनी। हालांकि अदालत के सामने अब तक कोई एक स्पष्ट और ठोस कारण स्थापित नहीं हो पाया है।

पुरानी रिपोर्टें और ठेकेदार की भूमिका पर सवाल

अजय बागड़िया ने सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2017 की रिपोर्ट का हवाला दिया। उनका कहना था कि इस रिपोर्ट में पूरे शहर में दूषित पानी की समस्या पहले से दर्ज थी, लेकिन अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को दबाकर रखा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनके अनुसार हर रिपोर्ट में ई-कोलाई और फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, फिर भी स्थिति सुधारने के लिए कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने अदालत को बताया कि फरवरी 2023 में मालवा इंजीनियर नामक कंपनी को भागीरथपुरा क्षेत्र में काम का ठेका दिया गया था। शर्तों के अनुसार एक साल में काम पूरा कर दूषित पानी की समस्या को समाप्त करना था। लेकिन ठेका दिए जाने के दो से ढाई साल बाद भी यह गंभीर घटना सामने आ गई, जिससे ठेकेदार द्वारा किए गए काम पर सवाल उठ रहे हैं। अधिवक्ता का कहना था कि पहले संबंधित इंजीनियर पर ही केस दर्ज किया जाना चाहिए और निगम की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

आज की सुनवाई से उम्मीदें

आज होने वाली सुनवाई में अदालत से उम्मीद की जा रही है कि वह अब तक की जांच, प्रशासनिक कार्रवाई, ठेकेदार की जिम्मेदारी और मौतों के कारणों पर पेश की गई रिपोर्टों की विस्तार से समीक्षा करेगी। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और आगे क्या योजना है।

Lokendra Mishra