इंदौर में दिग्विजय सिंह का विरोध और शीतलामाता बाजार में तनाव
मध्यप्रदेश के इंदौर में सांप्रदायिक तनाव के बीच शीतलामाता बाजार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शनिवार को बाजार पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने सराफा थाने जाकर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने का दबाव
इस विवाद की जड़ बाजार की उन दुकानों में मुस्लिम कर्मचारियों को रखने को लेकर है। भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य गौड़ ने व्यापारियों से अपील की थी कि वे अपनी दुकानों से मुस्लिम कर्मचारियों को हटाएं। उन्होंने इसके लिए 25 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया, जिसके बाद कई व्यापारी दबाव में ऐसा करने को मजबूर हुए।
व्यापारियों का कहना है कि वे ऐसा नहीं चाहते थे, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और धमकियों के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। इस स्थिति से सदियों पुरानी भाईचारे और एकता की भावना को क्षति पहुंच रही है।
दिग्विजय सिंह और हिंदू संगठनों के बीच टकराव
दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार और प्रशासन की तीखी आलोचना की। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मुस्लिमों को नौकरी से हटाने का दबाव कानूनन अपराध है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने अब तक इस मामले में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की।
जब दिग्विजय सिंह शीतलामाता बाजार पहुंचे, तो हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए उन पर चूड़ियां फेंकी। बाजार की दुकानों को भगवा झंडों और बैनरों से भर दिया गया, और दुकानदारों ने गले में केसरिया पट्टा पहना। महिलाओं ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
कांग्रेस का सक्रिय रुख
कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय हो चुकी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संभागायुक्त सुदामा खाड़े से मिला। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने दो दिन में कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।
दिग्विजय सिंह ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका भी लगाई है। इस याचिका पर सुनवाई शनिवार को होनी थी, लेकिन अब इसे 10 नवंबर तक स्थगित कर दिया गया है।
सांप्रदायिक सौहार्द पर खतरा
यह मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। यह एक बड़ा सवाल उठाता है कि सांप्रदायिक तनाव और विभाजन की राजनीति किस हद तक समाज में सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। व्यापारी समुदाय का कहना है कि वे दबाव में अपने कर्मचारियों को निकालने पर मजबूर हुए हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक स्थायी नहीं रह सकती।
निष्कर्ष
इंदौर का यह विवाद सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। पुलिस और प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करनी होगी ताकि समाज में बढ़ते तनाव को कम किया जा सके। साथ ही, राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी से काम करते हुए समाज में शांति बनाए रखने की दिशा में योगदान देना चाहिए।