जबलपुर कलेक्टर कोर्ट ने दो वरिष्ठ नागरिकों के पक्ष में बेदखली आदेश पारित किए
पहला मामला: 70 वर्षीय बसंत कुमार रामचंदानी बनाम पुत्र सुनील कुमार रामचंदानी
मदन महल निवासी 70 वर्षीय बसंत कुमार रामचंदानी ने वर्ष 1983 में अपनी कमाई से बेलबाग मेन रोड स्थित 1050 वर्गफुट का दो मंजिला मकान और दुकानें खरीदी थीं। वर्ष 2016 में उन्होंने इस संपत्ति की वसीयत अपने बेटे सुनील कुमार रामचंदानी के पक्ष में पंजीकृत कराई। वसीयत के बाद बेटे ने उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया और अपने ही घर से बाहर निकाल दिया। बसंत कुमार ने जुलाई 2025 में वसीयत निरस्त करा दी, फिर भी बेटे का कब्जा बना रहा।
बेटे सुनील कुमार के पास खेरमाई मंदिर के सामने कृपाल चौक, गुप्तेश्वर वार्ड और मदन महल रोड स्थित महानद्दा में दो मकान हैं। कृपाल चौक स्थित मकान से उसे 80 हजार रुपए मासिक किराया मिलता है, जबकि महानद्दा स्थित बंगले में वह परिवार के साथ रहता है। इसके बावजूद पिता को भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बुजुर्ग पिता ने पहले एसडीएम रांझी के समक्ष बेदखली का आवेदन दिया था। एसडीएम कोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को आदेश दिया कि यह संपत्ति से जुड़ा विवाद है और भरण-पोषण का मामला नहीं बनता। एसडीएम ने बेटे को पिता से विवाद नहीं करने और उन्हें शांतिपूर्वक रहने देने के निर्देश दिए थे, लेकिन मकान खाली कराने का स्पष्ट आदेश नहीं दिया। इसके विरुद्ध पिता ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 16 के तहत कलेक्टर कोर्ट में अपील की।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कहा कि बुजुर्ग पिता को अपनी स्वअर्जित संपत्ति में जीवन के अंतिम पड़ाव पर बिना विवाद के शांतिपूर्वक रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में यह चिंताजनक है कि बुजुर्ग पिता को अपने ही बेटे से प्रताड़ना झेलनी पड़े। बेटा सक्षम है और उसके पास रहने के अन्य साधन भी हैं, इसलिए उसे पिता की संपत्ति से अलग रहना चाहिए। कलेक्टर ने बेटे सुनील कुमार रामचंदानी को परिवार और सामान सहित एक महीने के भीतर संपत्ति खाली कर पिता को सौंपने का आदेश दिया। तहसीलदार रांझी और थाना प्रभारी बेलबाग को आदेश का समय-सीमा में पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरा मामला: 87 वर्षीय रूपलाल कोरी बनाम बहू रेनू कोरी
गोहलपुर थाना क्षेत्र के त्रिमूर्ति नगर (डॉ. राममनोहर लोहिया वार्ड क्रमांक 29) निवासी रूपलाल कोरी टेलीग्राफ फैक्ट्री से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी बचत से वर्ष 1986 में 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था। उनके पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। उनके दिवंगत बेटे राकेश कोरी की पत्नी रेनू कोरी ने मकान के कमरों और दुकान पर कब्जा कर रखा है। मकान पुराना और जर्जर होने के कारण जब उन्होंने मरम्मत कराने की कोशिश की, तो उसमें बाधा डाली गई, जिससे उन्हें बुढ़ापे में मानसिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
रूपलाल कोरी ने पहले एसडीएम अधारताल के समक्ष बेदख
Satyam Tripathi