केंद्रीय कर्मचारियों के कैशलेस इलाज नियमों में बड़ा बदलाव, 10 साल बाद नई दरें लागू

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केंद्रीय कर्मचारियों के कैशलेस इलाज नियमों में बड़ा बदलाव

सरकार ने 10 साल बाद केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत कैशलेस इलाज की दरों में बड़ा बदलाव किया है। नई दरें अस्पताल की कैटेगरी, शहर की श्रेणी और वार्ड प्रकार के आधार पर तय होंगी। इससे निजी अस्पतालों को भी लाभ होगा, क्योंकि दरों में औसतन 25-30% तक वृद्धि की गई है।

कैशलेस सुविधा में सुधार की उम्मीद

पिछले कई सालों से सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स शिकायत कर रहे थे कि CGHS से जुड़े अस्पताल कैशलेस इलाज देने से इनकार करते हैं। मरीजों को पहले इलाज के पैसे खुद देने पड़ते थे और फिर महीनों बाद रिफंड मिलता था। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार ने नई दरें लागू करने का निर्णय लिया है।

नई दरों की संरचना

नई दरें चार मुख्य मानकों पर आधारित होंगी:

जो अस्पताल NABH/NABL प्रमाणित नहीं हैं, उन्हें 15% कम दरें मिलेंगी, जबकि सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को 15% अधिक दरें मिलेंगी। शहर की श्रेणी के अनुसार Y और Z श्रेणी के अस्पतालों को क्रमशः X श्रेणी से 10% और 20% कम दरें दी जाएंगी।

अस्पतालों के लिए नियम

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे 13 अक्टूबर तक नई दरें स्वीकार करें। जो अस्पताल ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें CGHS सूची से हटा दिया जाएगा। अस्पतालों को 90 दिनों के भीतर नया समझौता (MoA) साइन करना होगा।

कर्मचारियों और अस्पतालों दोनों को लाभ

इस संशोधन से कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज में आसानी होगी और अस्पतालों को उचित दरों पर भुगतान मिलेगा। नई नीति CGHS सिस्टम को अधिक व्यवहारिक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।