किन्नर शंकराचार्य पर घमासान : संत समिति की 11 दिन की मोहलत , FIR की चेतावनी

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किन्नर शंकराचार्य  पर  घमासान :  संत समिति  की 11 दिन की  मोहलत ,  FIR  की चेतावनी

किन्नर शंकराचार्य पर विवाद: संत समिति की 11 दिन की मोहलत, FIR की चेतावनी

भोपाल में महाशिवरात्रि पर आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में हिमांगी सखी को किन्नर शंकराचार्य घोषित किए जाने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस सम्मेलन में राजस्थान के पुष्कर में एक नई किन्नर शंकराचार्य पीठ स्थापित करने की घोषणा भी की गई थी। इसके साथ ही, चार जगद्गुरु और पांच महामंडलेश्वर भी घोषित किए गए थे।

संत समाज का कड़ा विरोध

अखिल भारतीय संत समिति मध्य प्रदेश के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी अनिलानंद ने इस पूरे घटनाक्रम के खिलाफ खुलकर विरोध जताया है। उन्होंने संबंधित पक्ष को 11 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि घोषित पदों का खंडन नहीं किया गया तो धारा 420 सहित आपराधिक केस दर्ज कराया जाएगा। स्वामी अनिलानंद ने इस घोषणा को सनातन परंपरा के साथ गंभीर छेड़छाड़ बताया। उन्होंने कहा कि बिना किसी अधिकृत धार्मिक प्रक्रिया के शंकराचार्य, जगद्गुरु और महामंडलेश्वर जैसे पदों की घोषणा करना एक गंभीर विषय है। इस मामले की शिकायत स्वामी अनिलानंद ने 15 फरवरी को पुलिस कमिश्नर से भी की थी।

शंकराचार्य पद की गरिमा और प्रक्रिया

स्वामी अनिलानंद ने इस घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा, "हम पूछते हैं कि आप हो कौन? किस हैसियत से महंत, महामंडलेश्वर और शंकराचार्य बना रहे हैं?" उन्होंने जोर दिया कि संत बनाने का एक विधान होता है और यह कोई मंचीय कार्यक्रम नहीं है जहाँ किसी को भी कोई पद दे दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य पद सनातन परंपरा का सर्वोच्च आध्यात्मिक पद है। इसकी नियुक्ति एक निर्धारित धार्मिक प्रक्रिया से होती है, जिसमें वेद-वेदांत का गहन ज्ञान, दंडी संन्यास परंपरा और अखाड़ों की मान्यता शामिल होती है।

केवल चार मूल पीठें हैं मान्य

परंपरा का हवाला देते हुए स्वामी अनिलानंद ने बताया कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित केवल चार मूल पीठें ही मान्य हैं, जिनमें ज्योतिर्मठ, शृंगेरी शारदा पीठ, गोवर्धन मठ और द्वारका शारदा पीठ शामिल हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया, "जब परंपरा में चार पीठ हैं तो पांचवां शंकराचार्य कैसे?" उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अन्य पीठों के शंकराचार्य, अखाड़ा परिषद और काशी विद्वत परिषद की मंजूरी ली गई थी। भोपाल में घोषित किन्नर शंकराचार्य पीठ को लेकर ज्योतिष मठ संस्थान से जुड़े पंडित विनोद गौतम ने भी आपत्ति दर्ज की है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में चार मूल पीठों की ही व्यवस्था है, और उसी के अनुरूप शंकराचार्य पद की मान्यता तय होती है।

किन्नर समाज में मतभेद का दावा और अन्य आपत्तियां

स्वामी अनिलानंद ने दावा किया कि किन्नर समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है। उनके अनुसार, आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से जुड़ा धड़ा इस घोषणा का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा, जो जूना अखाड़े से संबद्ध है, किसी नए शंकराचार्य की घोषणा में शामिल नहीं है। उन्होंने सुरैया नायक का सम्मान करते हुए कहा कि उन्हें विधिवत प्रक्रिया से महामंडलेश्वर बनाया गया था, जो कि वैध है। हालांकि, स्वयं-भू घोषणाओं को स्वीकार्य नहीं बताया। हिमांगी सखी के एक बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि "जो सनातन नहीं मानेगा, वह पाकिस्तान जाए", पर भी स्वामी अनिलानंद ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के वक्तव्य सनातन की मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं।

कौन हैं हिमांगी सखी?

हिमांगी सखी मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हैं और किन्नर समाज में धार्मिक नेतृत्वकर्ता के रूप में जानी जाती हैं। वे पहले महामंडलेश्वर और जगद्गुरु पद पर रह चुकी हैं। अब उन्हें शंकराचार्य की उपाधि दी गई है। उनका पहला पीठ पुष्कर में स्थापित किया जाएगा, और उन्होंने आगे देशभर में अलग-अलग स्थानों पर पीठ स्थापित करने की बात कही है।

11 दिन का अल्टीमेटम और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

स्वामी अनिलानंद ने स्पष्ट किया है कि 11 दिन की समय सीमा में उन्हें स्पष्टीकरण नहीं चाहिए, बल्कि घोषित पदों का तत्काल खंडन और निरस्तीकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वे धारा 420 सहित अन्य आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज कराएंगे। उनका तर्क है कि जब किसी संविधान या मान्य धार्मिक संरचना में कोई प्रावधान नहीं है और फिर भी पद घोषित किए जाते हैं, तो यह धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

Adarsh Chaurasiya