कमजोर होकर भी ईरान क्यों खींच रहा युद्ध लंबा? दुश्मन को झुकाने की है यह नई रणनीति.

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कमजोर होकर भी ईरान क्यों खींच रहा युद्ध लंबा? दुश्मन को झुकाने की है यह नई रणनीति.

कमजोर होकर भी ईरान क्यों खींच रहा युद्ध लंबा? दुश्मन को झुकाने की है यह नई रणनीति

ईरान इस समय एक बड़े खतरे का सामना कर रहा है, इसके बावजूद वह अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष को लंबा खींचने में लगा हुआ है। हाल के हफ्तों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें उसके कई बड़े नेता और सैन्य कमांड ढांचे के अहम लोग मारे गए हैं, जिससे उसकी नेतृत्व व्यवस्था को गंभीर झटका लगा है। देश के अंदर भी लोगों को जरूरी सामान की कमी, बुनियादी ढांचे का नुकसान और सख्त सुरक्षा माहौल झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद, ईरान की मौजूदा लीडरशिप लगातार आक्रामक बयान दे रही है और यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह लंबे समय तक संघर्ष झेल सकता है।

ईरान की युद्ध रणनीति और मांगें

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का मकसद इस युद्ध में जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाना, दुश्मनों को डराना और युद्ध के बाद की शर्तें तय करना है। वह संघर्ष को इसलिए बढ़ा रहा है ताकि अन्य देशों के लिए इसे जारी रखना बहुत महंगा हो जाए और वे समझौता करने पर मजबूर हो जाएं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान से सरेंडर करने को कहा है, लेकिन ईरान खुद को मजबूत स्थिति में दिखा रहा है और शांति के लिए अपनी शर्तें रख रहा है।

ईरान चाहता है कि युद्ध समाप्त होने के बाद क्षेत्र में एक नई व्यवस्था बनाई जाए। वह युद्ध के नुकसान की भरपाई (मुआवजा) भी मांग रहा है और खाड़ी देशों व अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों में बदलाव चाहता है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि युद्धविराम तभी संभव है जब यह सुनिश्चित हो जाए कि दुश्मन दोबारा हमला नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक दुश्मन अपने हमले पर पछतावा न करे और दुनिया व क्षेत्र में सही राजनीतिक व सुरक्षा हालात न बन जाएं।

होर्मुज स्ट्रेट और क्षेत्रीय प्रभाव

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बनाया जाना चाहिए, जिसमें ईरान के हितों को ध्यान में रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान आगे चलकर अपने विदेशों में फंसे पैसे को छुड़ाने या इस समुद्री रास्ते का उपयोग करने वाले देशों से टैक्स लेने की मांग कर सकता है। हाल के दिनों में जहाजों पर हुए हमलों और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव ने दिखाया है कि ईरान के पास दबाव बनाने के मजबूत साधन हैं। ईरान की सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी लीडरशिप वाली व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है।

विशेषज्ञों की राय और अमेरिकी आकलन

मिडिल ईस्ट से जुड़े मामलों की एक्सपर्ट सिना तूस्सी ने कहा कि ईरान चाहता है कि अभी जो दबाव है, उसे बाद में अपने फायदे में बदल सके। वह ऐसी स्थिति चाहता है जहां उसे अलग-थलग या खत्म करने की कोशिश न हो, बल्कि उसे क्षेत्र की स्थिरता का जरूरी हिस्सा माना जाए। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान युद्ध हार रहा है और उसकी सेना लगभग खत्म हो चुकी है। हालांकि, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नारगिस बाजोगली का कहना है कि पारंपरिक युद्ध के हिसाब से ईरान जीत नहीं रहा है, लेकिन उसे उसी तरह जीतने की जरूरत भी नहीं है। उसकी रणनीति युद्ध को इतना महंगा बना देना है कि सामने वाला देश उसे जारी न रख सके।

नया नेतृत्व और भविष्य की संभावनाएं

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) में अब नई पीढ़ी के कमांडर सामने आए हैं, जो इराक और सीरिया में ईरान की ताकत का उपयोग होते देख चुके हैं और उसी आधार पर फैसले ले रहे हैं। ईरान की रणनीति अब अपनी स्थिरता को पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जोड़ना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की यह रणनीति सफल होगी या नहीं। अब तक ज्यादातर खाड़ी देश इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं हुए हैं, हालांकि उन पर हमले हुए हैं। ऐसे में कई देशों ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका और इजराइल के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करेंगे। यूएई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि खाड़ी देशों में ईरान को सबसे बड़ा खतरा माना जाता है और युद्ध के बाद खाड़ी देश इजराइल के और करीब आ सकते हैं।

Sharad Shrivastava