मध्य प्रदेश कांग्रेस में फेरबदल: AICC ने 4 जिलों की कार्यकारिणी पर लगाई रोक, नई संख्या तय.

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मध्य प्रदेश कांग्रेस में फेरबदल: AICC ने 4 जिलों की कार्यकारिणी पर लगाई रोक, नई संख्या तय.

मध्य प्रदेश कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल

मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छिंदवाड़ा, मऊगंज, झाबुआ और सागर जिला कांग्रेस कमेटियों की हाल ही में घोषित कार्यकारिणी पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब इन जिलों में नई कार्यकारिणी संशोधित गाइडलाइन के अनुसार गठित की जाएगी, जिससे संगठन में पदाधिकारियों की संख्या सीमित हो सके।

चार जिलों की कार्यकारिणी पर आपत्ति के बाद लिया गया निर्णय

30 जनवरी को इन चार जिलों की जिला कांग्रेस कमेटियों की घोषणा की गई थी, लेकिन पदाधिकारियों की संख्या को लेकर कई आपत्तियां सामने आईं। विशेष रूप से, छिंदवाड़ा में 250 से अधिक पदाधिकारी बनाए जाने पर सवाल उठे। सागर में 141 और मऊगंज में 59 पदाधिकारी घोषित किए गए थे, जिसे संगठन में बढ़ती संख्या के तौर पर देखा गया। पार्टी हाईकमान ने इस पर सख्ती दिखाते हुए हस्तक्षेप किया।

AICC ने जारी की नई गाइडलाइन: 31 और 51 सदस्यीय संरचना

आपत्तियों के बाद, AICC ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए जिला कार्यकारिणी की संरचना और पदाधिकारियों की संख्या तय कर दी है। नई गाइडलाइन के अनुसार, जिला कार्यकारिणी की संख्या अब 31 या 51 सदस्यीय संरचना में होगी। इस निर्णय के बाद, पूरे प्रदेश में जिला कांग्रेस कमेटियों का गठन एक तय प्रारूप के तहत किया जाएगा। जिन जिलों की कार्यकारिणी पहले घोषित हो चुकी है, उन्हें नई सूची से बदला जाएगा।

कार्यकारिणी निरस्त नहीं, बल्कि पुनर्गठित होंगी: डॉ. संजय कामले

एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने स्पष्ट किया है कि संबंधित जिलों की कार्यकारिणी को निरस्त नहीं किया गया है, बल्कि नई गाइडलाइन के अनुसार उनका पुनर्गठन किया जाएगा। यह कदम संगठन को अधिक व्यवस्थित और संतुलित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

छिंदवाड़ा पर सबसे ज्यादा चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की कार्यकारिणी ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी थीं, जहां 258 पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। यहां कमलनाथ और नकुलनाथ को संरक्षक बनाया गया था। बड़ी संख्या में महामंत्री और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति के बाद संगठनात्मक संतुलन पर सवाल उठे थे, जिसके बाद हाईकमान को दखल देना पड़ा। अब नई गाइडलाइन लागू होने के बाद प्रदेशभर में कांग्रेस संगठन का ढांचा सीमित और व्यवस्थित रूप में दिखाई देगा। पार्टी नेतृत्व का संदेश साफ है कि संगठन में संख्या नहीं, बल्कि संरचना और संतुलन प्राथमिकता होगी।

Navjeet Kaur