मध्य प्रदेश में आधे से ज्यादा आबादी मुफ्त राशन पर निर्भर: चौंकाने वाले आंकड़े सामने.

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मध्य प्रदेश में आधे से ज्यादा आबादी मुफ्त राशन पर निर्भर: चौंकाने वाले आंकड़े सामने.

मध्य प्रदेश में आधी से अधिक आबादी मुफ्त राशन पर निर्भर

मध्य प्रदेश में आधे से ज्यादा आबादी मुफ्त अनाज का लाभ उठा रही है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 5,38,07,137 लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत मुफ्त राशन का लाभ ले रहे हैं। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि राज्य की कुल अनुमानित आबादी लगभग 9 करोड़ है, जिसके लिहाज से लगभग 60% आबादी अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह सरकारी मदद पर निर्भर है। इसका अर्थ है कि राज्य का हर दूसरा या तीसरा व्यक्ति 'गरीब कल्याण' योजना का हितग्राही है।

नीति आयोग की रिपोर्ट और लाभार्थियों की संख्या में विरोधाभास

नीति आयोग की जनवरी 2024 में जारी 'भारत में बहुआयामी गरीबी' रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 9 सालों (2013-14 से 2022-23) के दौरान मध्य प्रदेश में 2.30 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। एक तरफ जहां सरकार यह दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ 25 मार्च 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश के 5.38 करोड़ लोग आज भी 'मुफ्त राशन' पर निर्भर हैं, जो एक विरोधाभासी स्थिति दर्शाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी

राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों को देखें तो पूरे देश में कुल 79,40,02,614 लोग इस योजना के दायरे में हैं। इस बड़ी संख्या में अकेले मध्य प्रदेश के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 6.78% है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बाद मध्य प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा राज्य है जहां मुफ्त राशन लेने वालों की तादाद सबसे ज्यादा है।

अपात्रों की छंटनी के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य

सरकार ने अब इस व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 'टीपीडीएस संशोधन आदेश 2025' के तहत अब हर 5 साल में ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया अपात्रों को सूची से बाहर करने और केवल वास्तविक पात्र परिवारों को ही खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए अपनाई जा रही है। लाभार्थियों को जोड़ना और हटाना राज्यों की जिम्मेदारी है।

मुफ्त राशन योजना में मिलीं अनियमितताएं

मध्य प्रदेश में मुफ्त राशन योजना में बड़ी गड़बड़ी भी सामने आई है। ऐसे लोगों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है जिनकी सालाना आय 6 लाख रुपए से ज्यादा है। साथ ही, ऐसे लोग भी हैं जो किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं और टैक्स जमा करते हैं, लेकिन फिर भी वे इस योजना के लाभार्थी हैं। इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने 5.46 करोड़ हितग्राहियों के डेटा की जांच शुरू कर दी है।

Amit Pateria