मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला
मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से अब तक कुल 19 बच्चों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को छिंदवाड़ा जिले के दो और बच्चों, वेदांत काकुड़िया और जायुषा यदुवंशी, ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इन मौतों ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और जांच की मांग
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के जरिए जांच की जाए। साथ ही केंद्र सरकार से ड्रग रिकॉल पॉलिसी और टॉक्सिकोलॉजिकल सेफ्टी प्रोटोकॉल तैयार करने के निर्देश देने की भी अपील की गई है।
मध्य प्रदेश सरकार की सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है। कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, और ड्रग कंट्रोलर को हटाया गया है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि बच्चों की मौतें केमिकल टॉक्सिसिटी के कारण हुई हैं।
खतरनाक केमिकल की जांच और रोक
जांच में पाया गया कि सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा मानक से अधिक थी। सरकार ने इस केमिकल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दो और जहरीले सिरप की पहचान कर उन पर तत्काल रोक लगाई गई है।
इस घटना ने देशभर में दवा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसी त्रासदी को भविष्य में रोकने के लिए कदम उठा रही हैं।