मध्यप्रदेश में दवा व्यापार और मॉनिटरिंग की चुनौतियाँ
मध्यप्रदेश में फार्मास्युटिकल उद्योग का वार्षिक कारोबार लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का है, जो हर साल 5.7% की दर से बढ़ रहा है। हालांकि, इतने बड़े बाजार की निगरानी के लिए केवल 79 ड्रग इंस्पेक्टर और 3 सक्रिय लैब हैं। इनमें से भोपाल की लैब पूरी तरह कार्यशील है।
कफ सिरप से बच्चों की मौत और कमजोर व्यवस्थाएँ
प्रदेश में जहरीले सिरप जैसे कोल्ड्रिफ, री लाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर के कारण छिंदवाड़ा, बैतूल और अन्य क्षेत्रों में 23 बच्चों की मौत हो चुकी है। इन सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है।
छिंदवाड़ा से अब तक 21 दवाओं के सैंपल लिए गए हैं, जिनमें 15 की रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नए एसओपी तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें सैंपल सीधे लैब पहुंचाने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने की प्रक्रिया तय की गई है।
कम लागत में दवाएं बनाने का असर
छोटे फार्मास्युटिकल निर्माता गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं, जिससे जहरीली दवाओं की समस्या बढ़ रही है। भारत में फार्मास्युटिकल बाजार का वार्षिक कारोबार 2,30,867 करोड़ रुपये का है, जो हर साल 7.4% की दर से बढ़ रहा है।
सरकार और एजेंसियों का कदम
भोपाल, जबलपुर और इंदौर की लैब के अलावा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) भी प्रदेश में विस्तृत जांच कर रहा है। कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। तमिलनाडु सरकार ने कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली कंपनी को सील कर दिया है और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की घोषणा की है।