महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी को खड़गे ने बताया आचार संहिता का उल्लंघन

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महिला आरक्षण  और  लोकसभा सीटों  में बढ़ोतरी को खड़गे ने बताया  आचार संहिता  का उल्लंघन

खड़गे ने महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाने के सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी के लिए लाए जा रहे बिल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। खड़गे का कहना है कि सरकार इस महत्वपूर्ण कदम को जल्दबाजी में उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाना आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। दिल्ली में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में उन्होंने कहा कि सरकार आगामी विधानसभा चुनावों में फायदा पाने के लिए इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है।

लोकसभा सीटों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव

सरकार की योजना के तहत संविधान संशोधन बिल लाकर लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किया जा सकता है। इसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान होगा, जिससे महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 273 हो जाएगी। कैबिनेट ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के ड्राफ्ट को पहले ही मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, राज्यों की विधानसभा सीटों में भी 50% तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। सीटों का यह नया निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किए जाने की संभावना है।

राज्यों पर होने वाला प्रभाव

प्रस्तावित बदलावों के बाद उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या सबसे अधिक बढ़ेगी। यहाँ सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं, जिनमें 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी प्रकार महाराष्ट्र में सीटें 48 से बढ़कर 72, बिहार में 40 से 60 और मध्य प्रदेश में सीटें बढ़ने का अनुमान है। सरकार इस प्रक्रिया के लिए संविधान संशोधन के साथ-साथ परिसीमन कानून में बदलाव हेतु एक अलग साधारण बिल भी पेश कर सकती है। यह कानून दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू होगा।

ऐतिहासिक संदर्भ और कांग्रेस की राय

बैठक के दौरान खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है और जानकारी केवल प्रधानमंत्री के पत्र के जरिए सामने आई है। राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दोहराया। महिला आरक्षण का मुद्दा भारत में 1931 से चर्चा में रहा है, जिसमें 1993 के 73वें और 74वें संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में आरक्षण की शुरुआत हुई थी। अब इसे संसद और विधानसभाओं तक विस्तारित करने की तैयारी है।

Lokendra Mishra