मोहन सरकार की समीक्षा बैठकें: बीड़ी उद्योग, कौशल विकास और आदिवासी संस्कृति पर जोर
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार अपने दो वर्ष के कार्यकाल के करीब पहुँचते हुए राज्य में रोजगार, अधोसंरचना और आदिवासी विरासत को केंद्र में रखकर काम तेज कर रही है। खजुराहो में हुई विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठकों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
कौशल विकास को उद्योगों की मांग से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए कि युवाओं को केवल उन्हीं ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जाए, जिनकी इंडस्ट्री में वास्तविक मांग हो। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को सीधे उद्योगों की जरूरतों से जोड़ा जाए, ताकि युवाओं को अधिक रोजगार के अवसर मिल सकें। समीक्षा में यह जानकारी दी गई कि आने वाले तीन वर्षों में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में रिक्त पदों की भरती, नए टेक कार्यक्रम शुरू करने, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने और 40 प्रतिशत कोर्सों को एनबीए मान्यता दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाला मानदेय सीधे युवाओं के बैंक खातों में जमा होना चाहिए।
बीड़ी उद्योग और श्रमिकों को मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी
सरकार प्रदेश में बीड़ी उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। खजुराहो में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने बीड़ी श्रमिक परिवारों को बेहतर रोजगार से जोड़ने के लिए वन विभाग के साथ समन्वय कर समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का तेंदूपत्ता राज्य की संपत्ति है और इससे मिलने वाला रोजगार राज्य के ही लोगों को मिलना चाहिए। बीड़ी निर्माण से जुड़े हजारों परिवारों को फिर से रोजगार की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
नगरीय विकास, अधोसंरचना और अर्बन–रूरल क्लस्टर की अवधारणा
नगरीय विकास और आवास विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है कि अधोसंरचना विकास के हर कार्य को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि केवल काम की संख्या नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और स्थायित्व से पहचान बनाई जाए।
मुख्यमंत्री ने नगरीय विकास और ग्रामीण विकास विभाग को आपसी समन्वय के साथ “अर्बन–रूरल क्लस्टर” की अवधारणा पर काम करने के निर्देश दिए, ताकि शहर और गांवों के विकास में बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।
शहरों के लिए GIS मास्टर प्लान और अन्य योजनाएं
आगामी तीन वर्षों में नगर एवं ग्राम निवेश विभाग 38 शहरों के लिए जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार करेगा। साथ ही महानगर क्षेत्र कानून लागू किया जाएगा, टीडीआर पोर्टल का विस्तार किया जाएगा और टीओडी नीति लागू की जाएगी। इसके अलावा सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान के आधार पर विकास कार्य किए जाएंगे।
आदिवासी सांस्कृतिक केंद्र और शिक्षा संस्थानों की स्थापना
जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की समृद्ध जनजातीय विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के क्षेत्रों में जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए जाएं। इसके तहत मंडला में बैगा, छिंदवाड़ा में भारिया, श्योपुर में सहरिया और धार में भील जनजाति के लिए सांस्कृतिक केंद्र बनाए जाएंगे।
अगले तीन वर्षों में हर जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना है। इसके साथ ही 88 विकासखंडों में कला भवन भी बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
खजुराहो में हुई इन समीक्षा बैठकों के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह कौशल विकास को उद्योगों की मांग से जोड़ने, बीड़ी श्रमिकों और तेंदूपत्ता से जुड़े परिवारों को बेहतर रोजगार दिलाने, शहरों की अधोसंरचना को मजबूत करने और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की दिशा में समन्वित प्रयास करेगी। आगामी तीन वर्षों की योजनाओं के जरिए सरकार रोजगार, विकास और विरासत संरक्षण को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने की मंशा रखती है।
Bhavanesh Soni