मप्र कैबिनेट ने खत्म की 7 कर्मचारी कैटेगरी, आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ सिंचाई पैकेज

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मप्र कैबिनेट ने खत्म की 7 कर्मचारी कैटेगरी, आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ सिंचाई पैकेज

मध्यप्रदेश में कर्मचारी संरचना में बड़ा बदलाव, आदिवासी जिलों के लिए सिंचाई पैकेज मंजूर

सात कैटेगरी समाप्त, अब सिर्फ तीन प्रकार के कर्मचारी

मध्यप्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया कि कर्मचारियों की सात कैटेगरी, जिनमें दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, कार्यभारित, स्थायीकर्मी सहित अन्य वर्ग शामिल थे, को समाप्त किया जाएगा। अब राज्य में केवल तीन प्रकार के कर्मचारी माने जाएंगे: नियमित, संविदा और आउटसोर्स। जिन पुरानी कैटेगरी को समाप्त करने का फैसला हुआ है, उनके अंतर्गत वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी अपनी पूर्ण सेवा अवधि तक काम करते रहेंगे। उनके सेवानिवृत्त होते ही संबंधित पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। यदि किसी विभाग को उस पद की आवश्यकता महसूस होगी, तो उसके स्थान पर नियमित पद सृजित कर भर्ती की जाएगी।

कार्यभारित कर्मचारियों के लिए अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान

कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि वर्तमान में कार्यरत कार्यभारित कर्मचारी की सेवा अवधि में मृत्यु होने पर उसके आश्रित को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। पहले इस वर्ग के लिए ऐसा प्रावधान नहीं था। सरकार का तर्क है कि विभिन्न कैटेगरी के कारण न्यायालयीन मामलों में भ्रम की स्थिति बनती थी। नई व्यवस्था लागू होने और पदों के पुनर्गठन के बाद न्यायालय में कर्मचारी की कैटेगरी स्पष्ट बताने की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे बार-बार होने वाली सुनवाई से सरकार को राहत मिलेगी। साथ ही स्थायी और अस्थायी पदों के अंतर समाप्त होने के बाद विभागों को हर वर्ष अस्थायी पदों के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

नियमित और संविदा कर्मचारियों पर फोकस

सरकार ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था में प्राथमिक जोर नियमित और संविदा कर्मचारियों पर रहेगा। आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार के प्रत्यक्ष कर्मचारी नहीं माना जाता, बल्कि उनकी सेवाएं कंपनियों के माध्यम से ली जाती हैं। इस पुनर्गठन का उद्देश्य प्रशासनिक स्पष्टता और मानव संसाधन प्रबंधन को सरल बनाना बताया गया है।

भोपाल-इंदौर मेट्रो संचालन के लिए 90.67 करोड़ रुपए

कैबिनेट बैठक में भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन और रखरखाव के लिए 90.67 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। यह प्रावधान नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रस्ताव के आधार पर किया गया है। योजना के अनुसार मेट्रो की आमदनी और व्यय के बीच का अंतर राज्य सरकार को वहन करना होता है, इसलिए संचालन संबंधी खर्च की व्यवस्था के लिए यह राशि मंजूर की गई है।

तीन आदिवासी जिलों के लिए 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज

नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित डूब क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। पहले से निर्धारित बजट के अतिरिक्त 1782 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज दिया गया है। इस राशि से अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही कुल 5512 करोड़ रुपए की योजनाओं को पूरा किया जा सकेगा। इन परियोजनाओं से 71,967 हेक्टेयर भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता प्राप्त होगी।

इंदौर के एमवाय अस्पताल का नवनिर्माण

कैबिनेट बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों को जानकारी दी कि इंदौर के एमवाय अस्पताल का नवनिर्माण 773 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। नया भवन 1450 बिस्तरों की क्षमता वाला होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार इससे स्वास्थ्य सेवाओं में आ रही कई कठिनाइयों से राहत मिलेगी। अस्पताल परिसर के साथ नर्सिंग हॉस्टल और ऑडिटोरियम का भी निर्माण प्रस्तावित है।

दृष्टि बाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों और कोचों को सम्मान

मुख्यमंत्री ने बताया कि विमेन टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 (ब्लाइंड) का फाइनल जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल मध्यप्रदेश की तीन दृष्टि बाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ी सुनीता सराठे, सुषमा पटेल और दुर्गा येवले को 25-25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी जा रही है। प्रत्येक खिलाड़ी को 10-10 लाख रुपए नकद और 15-15 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही टीम के तीनों कोच सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पहाड़े को एक-एक लाख रुपए प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई है।

भरेवा धातु शिल्प को जीआई टैग और ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार

कैबिनेट के दौरान यह जानकारी भी साझा की गई कि बैतूल जिले के भरेवा धातु शिल्प को भौगोलिक सूचक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है। इस शिल्प के लिए शिल्पकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। गोंड जनजाति की एक उपजाति द्वारा धातु ढलाई का यह कौशल पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता है और इसके अंतर्गत प्रतीकात्मक देवी-देवताओं की मूर्तियां, पारंपरिक आभूषण, गोंड अनुष्ठानों में प्रयुक्त धार्मिक सामग्री तथा मोर लैंप, बैलगाड़ी, घंटियां, पायल और दर्पण के फ्रेम जैसी सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग है।

इसके अलावा राष्ट्रपति ने 9687 यूनिट बिजली बचाने पर गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन उपलब्धियों के लिए संबंधित पक्षों को बधाई दी।

निष्कर्ष

कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों के जरिए राज्य सरकार ने एक ओर कर्मचारी संरचना को सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, तो दूसरी ओर आधारभूत संरचना, सिंचाई, स्वास्थ्य सेवाओं और खेल व शिल्प क्षेत्र को भी प्रोत्साहन दिया। इन नीतिगत और वित्तीय अनुमोदनों का प्रभाव आने वाले समय में प्रशासनिक दक्षता, कृषि सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन और सामाजिक सम्मान को मजबूत करने के रूप में देखने की अपेक्षा की जा रही है।

Pushpendra Chaubey