मुख्य सचिव की कलेक्टरों को कड़ी चेतावनी भ्रष्टाचार, ढिलाई और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख

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मुख्य सचिव की कलेक्टरों को कड़ी चेतावनी भ्रष्टाचार, ढिलाई और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख

मुख्य सचिव की सख्त चेतावनी: कलेक्टरों पर बढ़ी निगरानी, भ्रष्टाचार से दूर रहने के निर्देश

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में जिलों के कलेक्टरों और कमिश्नरों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासनिक कामकाज और आचरण को लेकर न तो कोई चीज छिपी रहती है और न ही शिकायतों को नजरअंदाज किया जाएगा।

पीएमओ और सीएम की कड़ी मॉनिटरिंग पर जोर

मुख्य सचिव ने बताया कि मध्यप्रदेश के हर प्रशासनिक मूवमेंट पर प्रधानमंत्री कार्यालय नजर रखता है। कलेक्टर किसी तरह का नवाचार करें या भ्रष्टाचार जैसे किसी मामले में शामिल हों, इसकी जानकारी पीएमओ तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी कलेक्टरों की हर गतिविधि की जानकारी रखते हैं।

मुख्य सचिव के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कई बार यह टिप्पणी की है कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता, इसलिए कलेक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे अपने आचरण को संयमित रखें और ऐसी स्थिति न बनने दें कि उनके खिलाफ शिकायतें आएं। उन्होंने कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके पास और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं, इसलिए समय रहते सुधार जरूरी है।

अन्य राज्यों से भी आता है कामकाज का फीडबैक

अनुराग जैन ने कहा कि कलेक्टरों का काम केवल प्रदेश स्तर पर ही नहीं देखा जाता, बल्कि दूसरे राज्यों के नेता और अफसर भी उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं। वहां से भी फीडबैक आता है, जो उनके काम की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है। उन्होंने इसे कड़ी मॉनिटरिंग का संकेत बताते हुए ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करने की नसीहत दी।

85 बिंदुओं पर जिलावार समीक्षा

मुख्य सचिव ने 7 और 8 अक्टूबर को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की। बैठक में टॉप थ्री और बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा की गई और कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधार के निर्देश दिए गए।

‘मुस्कान अभियान’ की समीक्षा

बैठक में महिला सुरक्षा और नाबालिग बालिकाओं की तलाश से जुड़े ‘मुस्कान अभियान’ की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि इस अभियान के तहत 1900 से अधिक बालिकाओं की बरामदगी हुई है। जन जागरूकता के मामले में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली शीर्ष पर रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड निचले पायदान पर रहे।

राजस्व विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी

मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर असंतोष जताया। आरसीएमएस (Revenue Case Management System) के मामलों के निराकरण में देरी पर उन्होंने कहा कि कलेक्टरों का नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है। कई मामलों में निराकरण दिखाने के बाद भी केस दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे सिस्टम की समीक्षा का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि एक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपनी आईटी कंपनी को काम देने के लिए एक मामले को रोके हुए हैं, जबकि सॉफ्टवेयर तैयार है। मुख्य सचिव पहले भी तीन बार नया सिस्टम लागू करने के निर्देश दे चुके हैं, फिर भी देरी पर उन्होंने नाराजगी जताई।

बैठक के दौरान अनुशासनहीनता और मनरेगा पर असंतोष

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर मुख्य सचिव ने नाराजगी व्यक्त की। साथ ही मनरेगा की प्रगति पर भी असंतोष जताया गया। समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि जहां प्रगति शून्य है, वहां सीईओ के पद रिक्त हैं, जिस पर सुधार के निर्देश दिए गए।

बैठक की तारीखें कई बार बदलीं

कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा बैठक की तारीखें कई बार बदली गईं। पहले 31 दिसंबर, फिर 5 जनवरी और उसके बाद 15 जनवरी तय की गई, लेकिन प्रशासनिक कारणों से बैठक नहीं हो सकी। चौथी बार तय की गई तारीख पर बुधवार को यह समीक्षा बैठक आयोजित हो पाई।

सड़क सुरक्षा और राहवीर योजना की समीक्षा

मुख्य सचिव ने कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ सड़क सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन ऑवर में मदद मिल सके। इस योजना में 1600 अस्पतालों को शामिल किया गया है।

उन्होंने सड़कों पर सुरक्षा के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की बात कही और बताया कि सड़क हादसों में मृतकों की संख्या में 45 से 50 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। गुना, डिंडौरी, मैहर, मुरैना और श्योपुर जैसे जिलों को सड़क सुरक्षा पर और अधिक काम करने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में 481 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं और इन्हें दूर करने के प्रयास जारी हैं।

अवैध खनन और समाज विरोधी गतिविधियों पर सख्ती

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि वे अवैध खनिज कारोबार सहित अन्य समाज विरोधी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाएं। भिंड, मुरैना, शहडोल, जबलपुर और नरसिंहपुर जिलों में विशेष अभियान चलाने के लिए कहा गया।

एससी-एसटी मामलों के लंबित केसों पर चिंता

एससी-एसटी मामलों में कार्रवाई नहीं होने के कारण लंबित केसों पर भी मुख्य सचिव ने चिंता जताई। सागर कलेक्टर और एसपी सहित असंतोषजनक प्रदर्शन वाले जिलों को संवेदनशील होकर मामलों के निराकरण के निर्देश दिए गए। उन्होंने गंभीरता से समयसीमा तय करते हुए एसओपी जारी करने को कहा, ताकि ऐसे मामलों का समयबद्ध समाधान हो सके।

कलेक्टरों और एसपी के लिए समन्वय के निर्देश

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि वे माह में कम से कम दो दिन संयुक्त रूप से बैठक और दौरे करें, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए समन्वित प्रयास हो सकें। उन्होंने कलेक्टरों से शासन की उच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं की हर माह समीक्षा करने और विकासखंड एवं ग्राम स्तर तक की गतिविधियों की निगरानी करने के निर्देश दिए।

नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रकरणों को तय समय सीमा में निपटाने पर जोर दिया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में सौ दिन से अधिक समय से लंबित सभी प्रकरणों का एक सप्ताह के भीतर निराकरण किया जाए। कलेक्टरों से ग्रामीण विकास के कार्यों की भी हर महीने समीक्षा करने के लिए कहा गया।

पुराने सरकारी वाहनों को स्क्रैप करने के निर्देश

बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने 15 वर्ष से अधिक पुराने सभी शासकीय वाहनों को स्क्रैप करने के निर्देश दिए। उन्होंने समग्र रूप से साफ-सुथरे प्रशासन, पारदर्शी कार्यप्रणाली और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई।

Lokendra Mishra