नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़, 9 श्रद्धालुओं की मौत; प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
बिहार के नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के मघड़ा गांव स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार को चैत्र माह के आखिरी मंगलवार के अवसर पर हुई भगदड़ में नौ श्रद्धालुओं की मौत हो गई। मरने वालों में आठ महिलाएं और एक अज्ञात पुरुष शामिल हैं। यह हादसा भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण हुआ, जिसने स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर किया है।
घटना का विवरण और चश्मदीदों के बयान
मंदिर में दर्शन के लिए 25 हजार से अधिक श्रद्धालु उमड़े थे, जबकि मंदिर का गर्भगृह छोटा है और एक साथ 20 से अधिक लोगों को संभालने की क्षमता नहीं रखता। मौके पर न तो पुलिस बल मौजूद था और न ही भीड़ नियंत्रण के लिए कोई बैरिकेडिंग की गई थी। चश्मदीदों के अनुसार, लोग कतार में लगने की बजाय धक्का-मुक्की कर रहे थे। एक श्रद्धालु महिला ने बताया कि एक महिला को चक्कर आने से वह गिर पड़ी, जिससे भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे पर चढ़कर निकलने लगे, जिससे कई लोग नीचे दब गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और 6-7 मिनट में ही जमीन पर शव बिछ गए। एम्बुलेंस घटना के 40 मिनट बाद पहुंची, जिससे घायलों को समय पर मदद नहीं मिल पाई।
लापरवाही और प्रशासनिक कार्रवाई
यह घटना ऐसे समय हुई जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी नालंदा दौरे पर थीं। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों से 2500 जवान तैनात किए गए थे, लेकिन मंदिर में जुटी 25 हजार की भीड़ के लिए कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था। पुलिस और प्रशासन की इस गंभीर लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद, दीपनगर थाने के एसएचओ राजमणि को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपये और केंद्र सरकार ने 2 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने स्वीकार किया कि मंदिर में पुलिस टीम होनी चाहिए थी। वहीं, एडीजी कुंदन कृष्णन ने कुव्यवस्था और डिहाइड्रेशन को भी मौतों का एक कारण बताया।
यह घटना मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपायों की घोर अनदेखी का परिणाम है, जिसने एक धार्मिक अनुष्ठान को एक दुखद त्रासदी में बदल दिया।
Sharad Shrivastava