नेपाल में केपी ओली का इस्तीफा, देश में राजनीतिक अस्थिरता गहराई
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम देशभर में हो रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं के चलते उठाया गया। विरोध का नेतृत्व 'Gen Z आंदोलन' ने किया, जिसके तहत प्रदर्शनकारियों ने ओली के निवास और अन्य प्रमुख नेताओं की संपत्तियों पर हमला किया।
राजनीतिक अस्थिरता का लंबा इतिहास
नेपाल में पिछले 17 वर्षों में कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। इस राजनीतिक अस्थिरता के कारण जनता में आक्रोश बढ़ता गया, जिसने अब हिंसक प्रदर्शनों का रूप ले लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की स्थिति बांग्लादेश से काफी मिलती-जुलती है, जहां छात्रों के प्रदर्शनों ने हाल ही में सरकार पलट दी।
भारत से दूरी और चीन के नजदीकी
ओली को चीन के करीबी नेता माना जाता है। अपने चौथे कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत से दूरी बनाकर चीन के साथ कई समझौते किए, जैसे नेपाल-चीन रेलवे प्रोजेक्ट और ट्रांजिट ट्रिटी। उन्होंने भारत की बजाय चीन को अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चुना, जो पारंपरिक रूप से भारत के साथ होती थी।
भविष्य की चुनौतियां
ओली के इस्तीफे के बाद उनके देश छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओली भारत की बजाय किसी अन्य देश में शरण लेने की कोशिश करेंगे। वहीं नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता और जन आक्रोश का समाधान देश की जनता को ही करना होगा।
नेपाल की मौजूदा स्थिति इस ओर इशारा करती है कि देश को स्थिरता और मजबूत नेतृत्व की सख्त जरूरत है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेपाल इस संकट से कैसे उभरता है।