मध्य प्रदेश के डॉक्टर डिग्रियां गिरवी, रोजगार के लिए PMO से जवाब तलब

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मध्य प्रदेश के डॉक्टर डिग्रियां गिरवी, रोजगार के लिए PMO से जवाब तलब

<मध्य प्रदेश> में <3574> पद खाली, फिर भी

दिसंबर <2025> में हमारी

मेडिकल <एजुकेशन> विभाग का तर्क

मेडिकल <एजुकेशन> विभाग का तर्क है कि यह मामला <स्वास्थ्य> विभाग का है, जबकि <स्वास्थ्य> विभाग के अफसरों के पास इन डॉक्टरों की बात सुनने तक का समय नहीं है। <भास्कर> ने <हेल्थ> डायरेक्टर, एडिशनल सेक्रेट्री और अंडर सेक्रेट्री से इस संबंध में संपर्क किया, लेकिन कहीं से भी कोई स्पष्ट <जवाब> नहीं मिला।

सेना छोड़ <पीजी> पूरी की... अब अफसरों के चक्कर

मेजर <डॉ.> यश श्रीवास्तव बताते हैं कि

यश बताते हैं कि उन्होंने <पीजी> करने के लिए <एजुकेशन> <लोन> लिया था, जिसकीअब रुक गई है। <स्टैंडर्ड> ऑफ <लिविंग> बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। जहां भी <नौकरी> के लिए आवेदन करते हैं, वहां <ओरिजिनल> <सर्टिफिकेट> मांगे जाते हैं। यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि मेरे कई साथियों की परेशानी है। किसी की शादी अटकी हुई है तो दूसरे राज्यों से आए छात्र अपने गृह राज्य तक नहीं जा पा रहे हैं। <संवैधानिक> रूप से यह हमारी व्यक्तिगत <स्वतंत्रता> पर भी हमला है। हम बंधक जैसे हो गए हैं। हमने सरकार को <हाईकोर्ट> का <आदेश> भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि यदि <तीन> महीने तक बॉन्ड <पोस्टिंग> नहीं मिलती तो बॉन्ड स्वतः समाप्त माना जाएगा।

<आर्थोपेडिक्स> में <पीजी> कर चुके <डॉ.> अमित कुमार <हरियाणा> के रहने वाले हैं। वे कहते हैं कि <पीजी> पूरी होने के बाद भी मैं अपने गृह राज्य नहीं जा पा रहा हूं। वहां काम करने के लिए यहां सेजरूरी है।

<पल्मोनरी> <मेडिसिन> मेंकर चुके <डॉ.> शरद सिंगोर कहते हैं कि <पीजी> की <फीस> काफी ज्यादा होती है। हमारा परिवार इतनी <फीस> नहीं भर सकता था। <एजुकेशन> <लोन> मिलने में दिक्कत आई तो <पर्सनल> <लोन> लेना पड़ा। <पर्सनल> <लोन> पर <ब्याज> भी ज्यादा होता है। अब हालत यह है कि <लोन> की <किस्तें> भरना मुश्किल हो रहा है। <पीजी> <कंप्लीट> हुए <सात> महीने हो चुके हैं, लेकिन न हमें डिग्री मिल रही है और न ही <नौकरी>। हम तो बॉन्ड की शर्तों के मुताबिक गांवों में सेवा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार ने अब तक <पोस्टिंग> ही नहीं दी।

<मेडिकल> <एजुकेशन> डायरेक्टर ने <ऑन> <कैमरा> बोलने से इनकार किया

<मेडिकल> <एजुकेशन> डायरेक्टर <डॉ.> अरुणा कुमार से जब इस मामले में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पहले हमारे ऑफिस के पास <कॉलेजों> से सूची आती थी। ग्रामीण सेवा में <पोस्टिंग> के लिए हम यह सूची <हेल्थ> <डायरेक्टोरेट> को भेजते थे। उन्होंने बताया कि अब <कॉलेज> सीधे <स्वास्थ्य> <संचालनालय> को सूची भेजते हैं, इसलिए इस प्रक्रिया में हमारे ऑफिस की कोई भूमिका नहीं है। हालांकि <डॉ.> अरुणा कुमार ने <ऑन> <कैमरा> कोई <प्रतिक्रिया> देने से इनकार कर दिया।

<स्वास्थ्य> आयुक्त से भी <जवाब> नहीं मिला

<स्वास्थ्य> आयुक्त धनराजू

<पीजी> डिग्री पूरी होने के बाद भी ग्रामीण सेवा में <पोस्टिंग> नहीं मिलने और डॉक्टरों की <डिग्रियां> बंधक रखे जाने की <शिकायत> <डॉ.> दिव्यांश द्विवेदी ने <9> जून को <प्रधानमंत्री> <कार्यालय> में की थी। <शिकायत> में कहा गया था कि <डिग्रियां> रोके जाने से डॉक्टर <मानसिक> <तनाव> का सामना कर रहे हैं। <प्रधानमंत्री> <कार्यालय> ने इस <शिकायत> को

Vivek Singh