नेपाल से पकड़े गए मुनीम लूट के दो आरोपी

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नेपाल से पकड़े गए मुनीम लूट के दो आरोपी

सागर में मुनीम से 14 लाख की लूट के दो आरोपी नेपाल से गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के सागर जिले में गल्ला व्यापारी के मुनीम से हुई 14 लाख रुपये की लूट के मामले में फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों को पुलिस ने नेपाल के काठमांडू से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों को सागर लाकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है।

कैसे हुई थी लूट की वारदात

थाना मोतीनगर क्षेत्र में गल्ला व्यापारी पंकज केशरवानी की मंडी में पंकज ट्रेडर्स नाम से दुकान है। वे अनाज की खरीदी का व्यापार करते हैं। 15 दिसंबर को उनका मुनीम सुधीर दीक्षित भगवानगंज स्थित एसबीआई बैंक शाखा से नकदी निकालकर मंडी लौट रहा था।

मंडी से कुछ दूरी पर पहुंचते ही बाइक पर आए तीन बदमाशों ने उसे घेर लिया। आरोपियों ने मुनीम की आंखों में मिर्ची पाउडर फेंक दिया और डंडे से हमला किया। इसके बाद वे 14 लाख रुपये से भरा बैग छीनकर भाग निकले। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पीछा कर एक आरोपी भूपेंद्र सिंह ठाकुर, निवासी बम्होरी रेंगुवा, को बाइक सहित पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

सीसीटीवी के सहारे नेपाल तक पहुंची पुलिस

घटना में शामिल बाकी दो फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की। बैंक से लेकर वारदात स्थल, सीहोरा रोड, राहतगढ़, भोपाल और अन्य मार्गों पर लगे 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए।

फुटेज में आरोपी सागर से बस द्वारा भोपाल जाते, वहां से ट्रेन से दिल्ली और फिर दिल्ली से बस के जरिए नेपाल के काठमांडू की ओर जाते हुए दिखाई दिए। जांच के दौरान सामने आया कि भोपाल में आरोपी धर्मेंद्र ने राह चलते एक व्यक्ति से मोबाइल लेकर अपने परिजन को फोन किया। उसी कॉल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने उनका पीछा तेज किया।

नेपाल के काठमांडू से दबोचे गए आरोपी

पुलिस ने तीन टीमें गठित कर भोपाल, दिल्ली और नेपाल में तलाश अभियान चलाया। लोकेशन और तकनीकी इनपुट के आधार पर काठमांडू की एक धर्मशाला में दो आरोपी छिपे मिले। वहां से मुख्य आरोपी धर्मेंद्र, पिता वीर सिंह ठाकुर, निवासी सेमराकलां, और उसका साथी कुलदीप सिंह दांगी, निवासी पिपरिया बिलहरा, को गिरफ्तार किया गया।

दोनों को काठमांडू से सागर लाकर पूछताछ की जा रही है, ताकि लूट की रकम और घटना में शामिल अन्य लोगों की जानकारी मिल सके।

पहले से मंडी की जानकारी, रैकी कर रची साजिश

जांच में पता चला कि धर्मेंद्र कोरोना काल से पहले मंडी में काम कर चुका था। उसे वहां के व्यापार, पैसों के लेनदेन और नकदी के मूवमेंट की पूरी जानकारी थी। इसी आधार पर उसने इस लूट की साजिश रची।

सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र ने वारदात से 3–4 दिन पहले तक मुनीम सुधीर दीक्षित की गतिविधियों की लगातार रैकी की। घटना वाले दिन उसने अपने साथियों भूपेंद्र और कुलदीप को बुलाया और तीनों ने शराब पार्टी की। बताया गया कि लूट से करीब दो घंटे पहले धर्मेंद्र ने अपने साथियों को पूरी योजना बताई और बाद में तीनों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए।

बरामदगी और आगे की कानूनी कार्रवाई

मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह के अनुसार, अब तक आरोपियों से 6 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की जा चुकी है। शेष रकम के बारे में पूछताछ जारी है। साथ ही, लूट के लिए देसी कट्टा उपलब्ध कराने वाले और चोरी की रकम अपने पास रखने वालों को भी मामले में आरोपी बनाया जाएगा।

गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है, जहां पुलिस उनकी रिमांड की मांग करेगी, ताकि वारदात की पूरी साजिश, हथियारों की सप्लाई और पैसों के इस्तेमाल की जानकारी सामने लाई जा सके।

निष्कर्ष

मुनीम से करोड़ों की अनाज खरीद के लिए ले जाई जा रही 14 लाख रुपये की नकदी की लूट का यह मामला पुलिस के लिए बड़ी चुनौती था। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और लोकेशन ट्रैकिंग की मदद से पुलिस ने भारत से नेपाल तक आरोपियों का पीछा कर मुख्य दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बरामद नकदी और आगे की पूछताछ से उम्मीद है कि पूरी साजिश, शामिल अन्य लोग और शेष रकम भी जल्द सामने आएगी।

Lokendra Mishra