नितिन की नवीन एंट्री से भाजपा में सितारे जमीं पर

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नितिन की नवीन एंट्री से भाजपा में सितारे जमीं पर


—2028..2029 तक 'भाजपा' बदल देने वाला चेहरा नवीन तो भविष्य के जोड़ीदार कौन


(सवाल दर सवाल राकेश अग्निहोत्री)

नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन क्या बदलती भाजपा का वह चेहरा बनकर सामने लाया गया जो 28 के मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ राजस्थान विधानसभा चुनाव और उसके बाद 29 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देंगे..छत्तीसगढ़ के सह प्रभारी,पांच बार के विधायक और बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री नवीन ही क्या जेपी नड्डा की तरह कार्यकारी से नए राष्टीय अध्यक्ष बन जाएंगे..संभावना से आगे यही भाजपा का फिलहाल अंतिम सत्य नजर आता है..भाजपा संसदीय बोर्ड के फैसले ने पूरी पार्टी को फिर चौंकाया..एक झटके में आधा दर्जन से ज्यादा राष्ट्रीय अध्यक्ष के सभी बड़े दावेदार भाजपा के सितारे जमीं पर आ गए..धर्मेंद्र प्रधान,भूपेंद्र यादव,शिवराज सिंह चौहान,वसुंधरा राजे,संजय जोशी जैसे कई दिग्गज राष्ट्रीय अध्यक्ष के दावेदारों में सुर्खियां बटोर रहे थे..भाजपा के यह सितारे फिलहाल जमीन पर नजर आ रहे..इस बीच बिहार जिताने वाले चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान नहीं बल्कि बिहार में लगातार चुनाव जीत कर आ रहे मंत्री पद की कुछ दिन पहले ही शपथ लेने वाले को पार्टी ने कमान सौंप दी..नियुक्ति से ठीक 24 घंटे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़ में मौजूद नवीन ने भी शायद नहीं सोचा होगा की 45 साल की उम्र में पार्टी एक कार्यकर्ता पर भरोसा जताकर उसे कार्यवाहक ही सही पार्टी का नेतृत्व सौंप देगी.

नितिन नवीन अब बिहार तक सीमित ना रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति का चेहरा बन चुके हैं..कोई नया प्रयोग नहीं किया गया तो भाजपा पार्टी संविधान के तहत संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नाम पर अंतिम और निर्णायक मुहर लगेगी..मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण में जाने के साथ 14 जनवरी के बाद नड्डा के उत्तराधिकारी को लेकर नवीन माहौल बनना शुरू हो जाएगा..अटल - आडवाणी के बाद मोदी-शाह और नड्डा की भाजपा..राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा को पिछले 11 साल से सत्ता में बनाए हुए है..इस दौर में अटल-आडवाणी के साथ काम करने वाले कई बड़े चेहरे मोदी और नड्डा की टीम का हिस्सा बने हुए हैं..इसी दौर में मोदी और शाह ने राज्यों की राजनीति में संगठन और सत्ता के नेतृत्व बतौर नई पीढ़ी के नए चेहरों को स्थापित किया है..45 साल के नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिकता पूरे होने पर पहले चुनाव बंगाल तो उसके बाद उत्तर प्रदेश की बारी आएगी..देखना दिलचस्प होगा बंगाल से उत्तर प्रदेश क्या टिकट के दावेदार बनकर,नए चेहरे सामने लाना शुरू हो जाएगा.. सवाल क्या पुरानी पीढ़ी के नेताओं का एग्जिट प्लान भी नितिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सामने आने लगेगा..2029 में लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में भी विधानसभा के चुनाव 2028 में होना है..मध्य प्रदेश में शिव के राज के बाद मोहन काल पहले ही शुरू हो चुका है..मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मंत्रीमंडल पुनर्गठन को लेकर संकेत दे चुके हैं..जेपी नड्डा के बाद नितिन नवीन की कमान में भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश को नया नेतृत्व देने को लेकर कितना गंभीर या फिर जल्दबाजी में होगा यह देखना होगा..सवाल कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा संगठन में पावर डिलीवर का सिस्टम क्या जल्द नितिन के पास पहुंच जाएगा..नितिन ने प्रभारी रहते छत्तीसगढ़ को बहुत करीब से देखा है तो मध्य प्रदेश में भी युवा मोर्चा के उनके कार्यकाल और बिहार चुनाव के दौरान कई नेताओं से नजदीकियां पहले ही बढ़ चुकी है..मध्य प्रदेश में हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में भाजपा संगठन में बदलाव की प्रक्रिया पहले ही लगभग पूरी की जा चुकी है..नितिन की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर संभावित ताजपोशी के पूरे होने तक मध्य प्रदेश सत्ता संगठन और उसके नीति निर्धारकों को पार्टी नेतृत्व को भरोसे में लेकर ही अब आगे बढ़ना होगा..मोहन सरकार के 2 साल पूरे होने पर शुरू हुए जश्न का समापन 25 दिसंबर को अमित शाह की मौजूदगी में होना है..इस बीच जेपी नड्डा और मनोहर लाल खट्टर के कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने के कार्यक्रम पहले ही फाइनल हो चुके हैं..क्या नितिन नवीन भी इस बीच मोहन काल के 2 साल के जश्न के साक्षी बनेंगे.

नितिन नवीन कुछ दिन पहले भोपाल भी आए थे मिलने जुलने वाले पार्टी के नेता गदगद और तारीफ कर रहे कि नितिन को राजनीति भले ही विरासत में मिली हो लेकिन विवादों से दूर और उनकी ईमानदारी को पार्टी नेतृत्व ने न सिर्फ सराहा बल्कि भविष्य की भाजपा के लिए भरोसा करने के स्पष्ट संकेत भी दे दिए.. विद्यार्थी परिषद से जुड़े मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता नितिन के संपर्क में रहे हैं,तो युवा मोर्चा के नेता भी उनके सहयोगी बनकर अनुराग की टीम के सदस्य रहे हैं..समाज से जुड़े प्यार कनेक्शन की फोटो मंत्री विश्वास सारंग जोर-जोर से ट्वीट कर रहे..तो मध्य प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के साथ उनकी मेल मुलाकात भोजन बैठक और विश्राम की चर्चा भी सामने आ चुकी है..भाजपा प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने तो नितिन के साथ युवा मोर्चा में कदमताल किया है..SIR की जिम्मेदारी निभा रहे प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल का भी नितिन से संपर्क रहा है..मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहते नितिन उस टीम का हिस्सा बन चुके थे..नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालेंगे..तो क्या नड्डा की तरह नवीन भी..पार्टी अध्यक्ष बनकर मोदी के बाद के नए नेतृत्व नए चेहरे को भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर स्थापित करने की मजबूत कड़ी साबित होंगे..जो काम कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते राजनाथ सिंह,अमित शाह और जेपी नड्डा ने किया..क्या नितिन नवीन भी इसी लाइन पर संगठन को आगे बढ़ाएंगे..भविष्य की बीजेपी की पटकथा में अभी अटल आडवाणी की तरह मोदी और शाह की जोड़ी और चुनाव जीतने की गारंटी वाला पार्टी का चेहरा बने हुए हैं..तो क्या जब भी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे उनके उत्तराधिकारी के लिए सबसे बड़े दावेदार अमित शाह के साथ नितिन नवीन किसी नई भूमिका में नजर आएंगे..या फिर भाजपा की स्क्रिप्ट का सस्पेंस खत्म होने के लिए अभी इंतजार करना होगा..इंतजार मोदी के बाद भाजपा की नई जोड़ी का आखिर उसमें कौन कहां फिट होगा और वह चेहरा कौन सा होगा जो जोड़ी नंबर वन कहलाएगा..जेपी नड्डा भी छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक जा पहुंचे थे..तो नितिन नवीन भी सह प्रभारी छत्तीसगढ़ रहते हुए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं.

भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग हो या फिर मैनेजमेंट टारगेट चुनाव जीतना ही रहा है.. इस बार बिहार जहां चुनाव हो चुका है वहां से कायस्थ समाज के नितिन का नवीन कार्यवाहक अध्यक्ष बनना.. तात्कालिक और दूरगामी रणनीति के तहत कह सकते चुनावी बिसात का हिस्सा नजर नहीं आता .. अलबत्ता मोहन भागवत से अमित शाह की मुलाकात हो या फिर प्रधानमंत्री से वसुंधरा राजे की मुलाकात और दूसरी बंद कमरे की बैठक और मेल मुलाकात कह सकते हैं कि संघ और भाजपा में अनबन की अटकलों पर विराम जरूर लग चुका है.. लेकिन पार्टी संविधान की और दूसरी औपचारिकताओं के पूरा होने का इंतजार करना ही होगा.. क्योंकि उम्र अनुभव के मापदंड पर यह भाजपा की दूसरी पीढ़ी को भविष्य में अगलेचुनाव से पहले घर बैठाने का बड़ा संकेत लेकर सामने आया है ..