पदोन्नति नियम 2025 से बदलेगा प्रमोशन सिस्टम, अब खराब सीआर नहीं छुपेगी

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पदोन्नति नियम 2025 से बदलेगा प्रमोशन सिस्टम, अब खराब सीआर नहीं छुपेगी

पदोन्नति नियम 2025 लागू, अब खराब सीआर और लंबित मामलों पर सख्ती

सरकार ने लगभग 23 साल बाद नए पदोन्नति नियम 2025 लागू कर दिए हैं। इन नियमों का उद्देश्य विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाना है, ताकि केवल बेहतर कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी ही प्रमोशन पा सकें।

सीआर मूल्यांकन में अब केवल पिछले 7 साल मान्य

पहले पदोन्नति के लिए 10 साल पीछे तक की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (सीआर) देखी जा सकती थी, जिससे कर्मचारी अपनी खराब सीआर को छिपाकर केवल अच्छी रिपोर्टें सामने रख देते थे। अब नए नियमों के तहत केवल पिछले 7 साल की सीआर ही देखी जाएगी। इन सात वर्षों में से किसी 5 वर्ष की सीआर के अंक जोड़कर कुल 15 अंक बनाना अनिवार्य किया गया है, तभी पदोन्नति का लाभ मिलेगा।

नियमों के अनुसार, इन पांच सीआर में से कम से कम दो सीआर ए-प्लस (आउटस्टैंडिंग) होना जरूरी है। शेष ग्रेडिंग के संयोजन के रूप में चार सीआर ए-प्लस या तीन ए-प्लस और एक ए ग्रेड होने पर ही प्रमोशन की राह खुलेगी। इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में से कम से कम एक वर्ष की सीआर का शामिल होना भी अनिवार्य रखा गया है।

निलंबन, चार्जशीट और परिनिंदा पर कड़ी शर्तें

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी के सात वर्ष में से चार वर्ष निलंबन में बीते हैं तो उसे प्रमोशन का मौका नहीं मिलेगा। हालांकि दोषमुक्त होने पर प्रमोशन दिया जा सकेगा, लेकिन नियमानुसार सीआर की शर्तें फिर भी लागू रहेंगी।

विभागीय जांच के बाद लगने वाला सबसे छोटा दंड परिनिंदा भी अब अधिक प्रभावी होगा। पहले यदि परिनिंदा दंड नवंबर में लगता था तो दिसंबर में वर्ष समाप्त होते ही उसका प्रभाव खत्म हो जाता था। अब यह दंड लगने की तिथि से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा और पदोन्नति पर असर डालेगा।

सस्पेंशन, चार्जशीट या लघु शास्ति का ज्ञापन लंबित होने, किसी आपराधिक मामले में अभियोजन स्वीकृति हो जाने या क्रिमिनल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने की स्थिति में भी प्रमोशन रोक दिया जाएगा। पहले ऐसे मामलों में फाइलें सीलबंद रखकर पदोन्नति दी जा सकती थी, जिस पर अब रोक लगाने का प्रयास किया गया है।

ट्रांसफर के बाद दोनों जगह के काम का संयुक्त मूल्यांकन

यदि किसी वर्ष किसी कर्मचारी का तबादला हो जाता है, तो अब उस वर्ष के कार्य का मूल्यांकन उसकी पूर्व पदस्थापना और नई पदस्थापना दोनों के काम को जोड़कर किया जाएगा। पहले जिस जगह का काम खराब माना जाता था, उसे रिकॉर्ड से हटाने या छिपाने की गुंजाइश रहती थी, जिसे नए नियमों से रोकने की कोशिश की गई है।

क्लास अनुसार अंक और बोनस अंक की नई व्यवस्था

प्रमोशन के लिए विभिन्न वर्गों के लिए अनिवार्य अंक भी तय किए गए हैं। क्लास-वन के कर्मचारियों को 15 अंक, क्लास-दो और तीन से प्रथम तक के लिए 13 अंक तथा तृतीय वर्ग से नीचे के कर्मचारियों को 12 अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा। साथ ही पिछले पांच वर्ष में कम से कम दो सीआर का ए-प्लस होना इन सभी पर लागू रहेगा।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को बोनस अंक देने की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब बोनस अंक केवल तभी दिया जाएगा जब उसी श्रेणी का कोई दूसरा दावेदार कतार में न हो। यदि कोई उम्मीदवार दूसरे या तीसरे नंबर पर दावेदार है, तो उसे बोनस के बजाय मेरिट के आधार पर प्रमोशन दिया जाएगा।

आरक्षण नियम पर कोर्ट में चुनौती, लेकिन मेरिट आधारित नियम प्रभावी

हाईकोर्ट में फिलहाल पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े नियम 2025 को चुनौती दी गई है। हालांकि मेरिट के आधार पर सामान्य पदोन्नति के नियमों को कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई है। इसी कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को नए नियम भेज दिए हैं, जिन्हें विभागीय पदोन्नति कमेटी के लिए आधार बनाया जाएगा।

ये नियम केवल नियमित पदोन्नति ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों-अधिकारियों को मिलने वाली क्रमोन्नति और आईएएस अवॉर्ड जैसे उच्च स्तर की पदोन्नति प्रक्रियाओं पर भी लागू होंगे। इस तरह नए पदोन्नति नियम 2025 के जरिए सरकार ने सीआर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाकर केवल बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

Janmejay Chaturvedi