खंडेलवाल का नो कंट्रोवर्सी फार्मूला फिर भी सवाल
भाजपा के नवागत अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम के पदाधिकारी के कम समय में सामने आने के बाद अब इंतजार मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा की जाने वाली निगम मंडल ,आयोग और दूसरी राजनीतिक नियुक्तियां का रहेगा.. जो पिछले चुनाव में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके या टिकट की दावेदारी से दूर रहकर चुनाव में काम कर चुके संगठन के कद्दावर नेताओं खासतौर से लीडर और कैडर का एडजस्टमेंट का नया फार्मूला बनकर जल्द सामने आएगा.. बदलते राजनीतिक परिदृश्य में जब पार्टी मैनेजमेंट खासतौर से मीडिया सब पर भारी तब हेमंत की सामने आई टीम को सब क्षत्रपों का साथ , विश्वास भाजपा के विकास के नए फार्मूले के साथ जीत की गारंटी से जोड़ा जा सकता है.. ना बांग्ला ना गाड़ी घोड़ा न मोह ना माया जाल जिसने अध्यक्ष बनवाया या बनाया उसके लिए तेरा तुझको अर्पण कर हेमंत उन सबके और सब अपने .. जो छूट गए उनके लिए गुंजाइश बरकरार..इस लाइन पर आगे बढ़ते हुए लो प्रोफाइल नेता के तौर पर संगठन की कमान संभालने वाले खंडेलवाल ने एक महामंत्री, एक उपाध्यक्ष ,एक प्रदेश मंत्री की कुर्सी की नियुक्ति का लॉलीपॉप दिखा कर दौड़ से दूर रह गए दावेदारों को साधने का विकल्प भी सामने रख दिया.. जब भाजपा में बड़ी कुर्सी के दावेदार के नाम चर्चा में आने पर ऐन टाइम पर काट दिए जाते हैं तब 1 साल तक कुर्सी पर अपने दावे को मजबूत साबित कर हेमंत ने यदि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व को अब निर्विवाद तौर पर मजबूत और असरदार साबित करने की लाइन पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है.. तो अपने आलोचकों और प्रतिस्पर्धी से सियासी दुश्मनी में तब्दील करने को लेकर सावधानी भी खूब बरती है.. पर्दे के पीछे सभी क्षत्रपों से वन टू वन चर्चा कर हेमंत ने भोपाल के समिधा से लेकर नदी के घर और चित्रकूट के संस्थान से जुड़े सभी संघ के पूर्व वर्तमान, अनुभवी पदाधिकारी को भरोसे में लेकर आगे बढ़ना मुनासिब समझा.. धैर्य और संयम के साथ कम बोलना लेकिन सबकी सुनना सिर्फ अपने मन की नहीं करना बल्कि पार्टी हित में सामूहिक फैसला उनका फार्मूला बनकर सामने आया है..सत्ता और संगठन की सबसे पावरफुल नई तिगड़ी ने विधानसभा चुनाव 2028 को ध्यान में रखते हुए जमावट तेज कर दी है.. यह सब कुछ उस वक्त रफ्तार पकड़ रहा है जब मोहन सरकार 2 साल पूरे कर रफ्तार पकड़ रही है.. डॉ मोहन यादव को फ्री हैंड के स्पष्ट संकेत राष्ट्रीय नेतृत्व खास तौर से मोदी, शाह, नड्डा का भरपूर आशीर्वाद और संघ से ज्यादा एक वरिष्ठ अनुभवी पदाधिकारी का वरदहस्त सरकार की ताकत और संगठन पर नए सिरे से मजबूत पकड़ साबित हो रही तब तब हेमंत की इस नई टीम के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं की नई पोजिशनिंग का इंतजार जरूर रहेगा.. जो निराश,नाराज क्या उनका कोई नया ठिकाना बन सकता है..भाजपा संगठन में पार्टी संविधान के तहत सीमित पद पर नियुक्ति कोई आसान काम नहीं.. कई दौर की लंबी एक्सरसाइज के बाद जो चेहरे महामंत्री, उपाध्यक्ष, प्रदेश मंत्री बनने में सफल रहे उनकी उपयोगिता से इनकार नहीं किया जा सकता.. ऐसे में हेमंत की नई टीम में सबसे पावरफुल महामंत्री के तौर पर राहुल कोठारी का उभर कर सामने आना और लंबे समय तक भाजपा संगठन से पर्दे के पीछे जुड़े रहे राजेंद्र सिंह राजपूत की री एंट्री सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है.. इनमें से एक यदि मुख्यमंत्री मोहन यादव का वीटो तो प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का स्पेशल इंटरेस्ट गौर करने लायक है.. नई टीम में शामिल नहीं हो पाए चेहरों पर गौर करें तो विष्णु दत्त की भाजपा के संगठन शिल्पी अब बाहर कर दिए गए.. यह वक्त का तकाजा लेकिन उनके दर्द और कसक को भी नेतृत्व को समझना होगा, क्यों कि एक कार्यकर्ता शैलेंद्र शर्मा की फेसबुक पोस्ट से एक प्रक्रिया सामनेआ चुकी है.. राजधानी भोपाल से ही आलोक शर्मा, भगवान दास सबनानी,सीमा सिंह जैसे चेहरों पर रोक तो इंदौर से पदाधिकारी और मोर्चे में धरती पकड़ के तौर पर नए पदाधिकारीकी धमाकेदार एंट्री.. सिंधिया और तोमर के ग्वालियर से लोकेंद्र ,आशीष, रणवीर यथावत तो विंध्य क्षेत्र से कम प्रभावी नेतृत्व की कमी के बावजूद एडजस्टमेंट देखने को मिला है.. महाकौशल यदि खामोशी की चादर ओढ़े तो बुंदेलखंड से नई महिला नेतृत्व के साथ पुराने चेहरे पर दांव लगाकर सांसद बन चुकी कविता की काट तलाशी गई है.. उज्जैन से डाक्टर मोहन की पसंद और नापसंद का पूरा ख्याल रखा गया है.. बदलती भाजपा में लीडर और लीडर ही नहीं जुझारू कार्यकर्ताओं की दरकार महसूस की जा सकती है.. नवागत अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कंट्रोवर्सी का फार्मूला नई टीम के साथ सामने लेकिन ग्राउंड पर चुनौती से इनकार नहीं किया जा सकताहै.. सत्ता से लेकर संगठन तक मुख्यमंत्री मोहन की पसंद उनके भरोसेमंद हेमंत खंडेलवाल और अनुभवी हितानंद शर्मा भाजपा की ताकत लेकिन इस तिकड़ी से कार्यकर्ताओं की ही नहीं राष्ट्रीय नेतृत्व की भी अपेक्षा बढ़ाना भी लाजमी.. मध्य प्रदेश में हेमंत खंडेलवाल के सामने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का जुझारू नेतृत्व और संगठन के कायाकल्प की नई कवायत के बीच बदलती भाजपा और उसके नेतृत्व के लिए चुनौती सिर्फ कांग्रेस नहीं बल्कि भाजपा के अंदर जिला मंडल स्तर पर नाराज कार्यकर्ताओं को संतुष्ट और उन्हें भरोसे पर लेने की होगी.. कई जिला अध्यक्षों को बदले जाने के बावजूद अभी भी विष्णु दत्त की ग्राउंड पर जमावट और विधानसभा से लेकर लोकसभा तक सांसदों पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज की पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. मिशन 2028 विधानसभा चुनाव से पहले हेमंत और मोहन की भाजपा की पहली परीक्षा नगरीय निकाय चुनाव से इनकार नहीं किया जा सकता है.. हेमंत की भाजपा उनकी टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती भाजपा की इंटरनलपॉलिटिक्स कैबिनेट मंत्रियों के अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में जहां तनातनी से इनकार नहीं किया जा सकता.. चाहे फिर वह ग्वालियर चंबल संभाग में नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के वर्चस्व की सियासी लड़ाई हो, या फिर मालवा में खासतौर से मुख्यमंत्री मोहन यादव के बढ़ते कदम से बदलते सियासी मिजाज हो या फिर बिना क्षेत्र की राजनीति में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के खिलाफ पार्टी के दूसरे नेताओं की मोर्चाबंदी हो या फिर दिल्ली में दखल रखने वाले केंद्रीय मंत्रियों का मध्य प्रदेश प्रेम और दिल्ली का दखल उनकी पसंद से बनती बिगड़ती परिस्थितियों में संगठन से बढ़ती अपेक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ही टीम हेमंत को आगे बढ़ना होगा..