पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से संवाद किया, चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे

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पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से संवाद किया, चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे

पीएम मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव में स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से संवाद किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव' के कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बात की। स्वामीजी का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ था। होलोग्राम एक ऐसी 3D तकनीक है, जिसमें किसी व्यक्ति या वस्तु की तस्वीर असली जैसी दिखाई देती है और उसे अलग-अलग एंगल से देखने का एहसास होता है।

स्वामीजी के होलोग्राम ने कहा कि आपसे मेरी मुलाकात पहली बार फरवरी 1993 में हुई थी। आप मुझे शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी कार्यक्रम में आमंत्रित करने आए थे। मोदी ने जवाब दिया कि मैं खुशनसीब हूं कि फिर मुझे आपके दर्शन का सौभाग्य मिला। चिन्मय मिशन का तीन दिन का कार्यक्रम 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने पर सालभर से देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम हुए थे।

प्रधानमंत्री का संबोधन: आत्मनिर्भरता, विकसित भारत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण

मोदी ने कहा कि बीते दशकों में समय बदला है। देश के सामने नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। आज उसके समाधान का काम हम सबके सामने है। आज हमें आत्मनिर्भरता के लिए देश को जागरूक करना है। हमें 2047 के विकसित भारत संकल्प से सबको जोड़ना है। जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, जब चिन्मय मिशन भी 100 साल पूरे करेगा। यानी विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक है। मुझे विश्वास है, आप सब मिलकर विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।

मोदी ने कहा कि आज उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो रहा है। अयोध्या राम मंदिर हो, उज्जैन का महाकाल धाम हो या केदारनाथ या बद्रीनाथ हो, हर जगह ऐसा ही हो रहा है। एक समय भारत से बहुत सी मूर्तियां चोरी कर विदेश ले जाई गईं। इन्हें बेच दिया गया। कोई इन्हें पूछने वाला नहीं था। हम पिछले 12 साल में ऐसी 600 मूर्तियां वापस लाए हैं। देश अब उस राह पर आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना हमारे ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था। उनका विचार शक्ति हमारी ताकत है।

2015 में मुझे स्वामी जी की स्मृति में एक सिक्का जारी करने का मौका मिला था। मैंने कहा था कि स्वामी जी का जीवन एक प्रतीक है। उनके गुरु ने उन्हें आशीर्वाद दिया था- 'गो, रोर लाइक अ लॉयन' यानी जाओ, शेर की तरह दहाड़ो। अब चिन्मय मिशन का अमृत महोत्सव भी भारत के अमृत काल से जुड़ रहा है। ये भारत के संकल्प की असली ताकत है। हमारे वेदों में लिखा है- राष्ट्र का हित चाहने वाले हम लोग राष्ट्र को महान बनाएं। स्वामी जी ने गीता ज्ञान के अभियान की शुरुआत की। आज इसी का परिणाम है कि लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं।

1993 के फरवरी में मेरी गुरुदेव से मुलाकात हुई थी। मैं उन्हें अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने गया था। गुरु जी इसके बाद अमेरिका गए। उन्होंने लोगों को इस इवेंट के प्रति जागरूक किया। 3 अगस्त को अमेरिका के सैन डिएगो में स्वामी जी हमें छोड़कर चले गए। मैं वहीं था, हम सभी को पूज्य गुरुदेव की कमी महसूस हो रही थी। चिन्मय एक विचार है जिसकी शुरुआत एक चिन्मय ऋषि ने की थी। जो चिन्मय है, वह स्वयं ही अमर है। इसलिए इस इवेंट का नाम भी इतना ही महत्वपूर्ण है।

चिन्मय मिशन का विस्तार और वर्षभर के आयोजन

भारत में चिन्मय मिशन का नेटवर्क केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में फैला है। इन राज्यों में मिशन की मौजूदगी केंद्रों, आश्रमों, सत्संग, बच्चों और युवाओं के कार्यक्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों के जरिए है। मिशन के शैक्षणिक नेटवर्क में भारत में 80 से ज्यादा चिन्मय विद्यालय और कई कॉलेज शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी सामाजिक सेवा गतिविधियां चलती हैं।

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य गीता, उपनिषद और वेदांत की सीखों को आम लोगों तक पहुंचाना है। मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, आज मिशन के दुनियाभर में 350 से ज्यादा केंद्र और 1,000 से अधिक आध्यात्मिक अध्ययन समूह हैं। इस साल भर के उत्सव की शुरुआत पिछले साल हुई थी, जब प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु में इलैयाराजा के संगीत वाली तमिल भगवद् गीता जारी की थी।

इस दौरान कई बड़े कार्यक्रम हुए, जैसे कई जगहों पर बड़े हवन, त्रिपुरा में मां सौंदर्या चिन्मयी मंदिर की स्थापना और एक ऑनलाइन पाठ, जिसमें दुनिया भर के 1 लाख से ज्यादा लोगों ने एक साथ गीता के 15वें अध्याय का पाठ किया। इसके अलावा 'गीता पंचामृत' कार्यक्रम चलाया गया और गीता का संदेश फैलाने के लिए 15 नौजवानों ने पूरे देश में 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा की।

Sharad Shrivastava