ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल 2027-28 तक तैयार होने की संभावना
ब्रह्मोस एयरोस्पेस 2027-2028 तक ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन (एनजी) का पहला प्रोटोटाइप तैयार कर सकता है। ब्रह्मोस-एनजी वर्तमान मिसाइल का छोटा और हल्का रूप है। वर्तमान ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 3 टन है, जिसके कारण एक सुखोई-30 लड़ाकू विमान पर केवल एक ही मिसाइल लगाई जा सकती है।
नई ब्रह्मोस-एनजी का वजन केवल 1.3 टन होगा। इससे एक सुखोई-30 पर तीन मिसाइलें तैनात की जा सकेंगी। यह तेजस और राफेल जैसे छोटे लड़ाकू विमानों पर भी लगाई जा सकेगी। कंपनी के अनुसार, यह मिसाइल अधिक स्वदेशी तकनीक, नई प्रौद्योगिकी और हल्के मटेरियल से निर्मित होगी।
ब्रह्मोस-एनजी की विशेषताएं और क्षमताएं
कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयतीर्थ जोशी ने ANI को दिए साक्षात्कार में बताया कि मिसाइल अपनी शुरुआती 290 किलोमीटर स्ट्राइक रेंज से आगे की क्षमता प्रदर्शित कर चुकी है। अब कंपनी 1500 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल पर विचार कर रही है, लेकिन यह अभी केवल कागज पर है। इसके लिए रूस से बातचीत चल रही है।
विदेशी रुचि और रक्षा निर्यात पर प्रभाव
डॉ. जोशी ने बताया कि कुछ देशों ने लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकने वाली ब्रह्मोस को अपनी वायुसेना में शामिल करने में रुचि दिखाई है। इन देशों के पास सुखोई-30 विमान मौजूद हैं। इसके अलावा, कुछ देशों ने ब्रह्मोस-एनजी की इच्छा भी जताई है, जिसे पहले एयरबोर्न कॉन्फिगरेशन में विकसित किया जाएगा।
डॉ. जोशी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर में मिसाइल के प्रदर्शन के बाद विदेशी सेनाओं की इसके ऑपरेशनल और फंक्शनल पैरामीटर्स में दिलचस्पी बढ़ी है। सेनाएं ऐसा अत्याधुनिक सिस्टम चाहती हैं, जो तेजी से बदलते युद्ध के माहौल के अनुसार खुद को ढाल सके।
डॉ. जोशी ने कहा कि ब्रह्मोस एक बेहद आधुनिक हथियार है। यह समय के साथ विकसित हो रहा है और इसने अपने प्रदर्शन की क्षमता साबित की है। पूरे ऑपरेशन के दौरान मिसाइल ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाया। इस दौरान एक भी मिसाइल इंटरसेप्ट नहीं हुई।
डॉ. जोशी ने कहा कि मिसाइल के युद्ध प्रदर्शन का भारत के रक्षा निर्यात पर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, ब्रह्मोस भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा, “ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं है। यह आत्मविश्वास से भरे और आत्मनिर्भर नए भारत की ताकत, सटीकता और गर्व है।
सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस, नूर खान समेत कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे इस हथियार प्रणाली की ताकत सामने आई। ब्रह्मोस सिस्टम भारत के रक्षा निर्यात का भी अहम आधार है। भारत का रक्षा निर्यात 38,400 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इसमें सालाना 62.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Pushpendra Chaubey