PM मोदी ने एयरपोर्ट पर पुतिन को रिसीव कर दिया रेड कार्पेट वेलकम

· 1 min read
PM मोदी ने एयरपोर्ट पर पुतिन को रिसीव कर दिया रेड कार्पेट वेलकम

पुतिन भारत पहुंचे, मोदी ने एयरपोर्ट पर किया गर्मजोशी से स्वागत

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन की राजकीय यात्रा पर भारत पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर स्वयं पहुंचकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने गले मिलकर अभिवादन किया और एक ही टोयोटा एसयूवी में सवार होकर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के लिए रवाना हुए, जहां शाम को उनके सम्मान में निजी रात्रिभोज आयोजित होना है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है। इससे पहले वे दिसंबर 2021 में कम समय के लिए भारत आए थे। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत द्वारा 2023 में उनके खिलाफ वारंट जारी होने के बाद से पुतिन ने विदेशी दौरों को काफी सीमित रखा था और वे हाल के जी-20 सम्मेलनों में भी नहीं आए थे। इस पृष्ठभूमि में नई दिल्ली की यह यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मोदी का स्वागत संदेश और पुराने रिश्तों की चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं और लिखा कि वे अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि भारत-रूस की दोस्ती मुश्किल समय की कसौटी पर खरी उतरी है और इससे दोनों देशों की जनता को लाभ हुआ है। सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की लगभग 25 साल पुरानी तस्वीर भी वायरल हो रही है, जब 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के नए मुख्यमंत्री के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मॉस्को गए थे।

वाराणसी में विशेष स्वागत और दिल्ली में तैयारियां

पुतिन के स्वागत में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा आरती के दौरान दीयों से 'वेलकम पुतिन' लिखा गया। दिल्ली में उनके आगमन से पहले ही गार्ड ऑफ ऑनर की तैयारियां तेज कर दी गईं। एयरपोर्ट पर तीनों सेनाओं की संयुक्त टुकड़ी ने रिहर्सल किया, जिसमें बैंड, मार्चिंग दस्ते और सलामी गार्ड ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अभ्यास किया।

पुतिन का विमान और वैश्विक ट्रैकिंग

पुतिन जिस सरकारी विमान से भारत आए, उसका नाम इल्यूशिन-96 (IL-96) है, जिस पर सिरिलिक लिपि में 'Россия' लिखा होता है, जिसका अर्थ रूस है। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के अनुसार यह विमान आगमन के दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रैक किया जाने वाला फ्लाइट रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने इसकी लाइव लोकेशन देखी।

रूसी मंत्रियों के पहले से मौजूद रहने से बढ़ी कूटनीतिक हलचल

रूसी राष्ट्रपति के आने से पहले ही रूस के कई वरिष्ठ मंत्री दिल्ली पहुंच चुके थे। इनमें उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव, रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और कृषि मंत्री दिमित्री पेट्रोव शामिल हैं। साथ ही रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई को मानेकशॉ सेंटर पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने यात्रा को बताया अहम

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पुतिन की यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि रूस के साथ भारत के संबंध लंबे समय से अच्छे रहे हैं और यह रिश्ते किसी अन्य देश के साथ भारत के संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाते। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका, चीन, यूरोप और अन्य देशों के साथ भी अच्छे संबंध बनाए हुए है और यह आगे भी जारी रहेंगे।

रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलन की चुनौती

विश्लेषण के अनुसार पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब मोदी अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की कोशिश में हैं। भारत-रूस संबंध सोवियत काल से चले आ रहे हैं और पुतिन ने इन रिश्तों को विशेष महत्व दिया है। दूसरी ओर, भारत ने पश्चिमी दबाव के बावजूद रूस की खुली आलोचना नहीं की और युद्ध के समाधान के लिए बातचीत पर जोर दिया, जिसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के रूप में देखा जाता है।

रिपोर्टों में बताया गया कि भारत एक ओर रूस के साथ पारंपरिक रिश्ते बनाए रखना चाहता है, वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी रक्षा और व्यापारिक सहयोग बढ़ा रहा है। पिछले दशक में हथियार खरीद में अमेरिका और फ्रांस की हिस्सेदारी बढ़ी है, जिससे रूस की हिस्सेदारी कम होकर लगभग 36% रह गई, जबकि 2000 के दशक में यह 70-90% के बीच थी। इसके बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

भारत-रूस समिट और 2030 का आर्थिक रोडमैप

पुतिन अपने दौरे के दौरान 23वीं भारत-रूस समिट में भाग लेंगे, जो दोनों देशों के बीच होने वाली वार्षिक बैठक का हिस्सा है। इस बार मेजबानी भारत कर रहा है। समिट का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर के आसपास है।

इस मंच पर ऊर्जा, निवेश, तकनीक और उद्योग जैसे कई क्षेत्रों में नई साझेदारियों पर चर्चा की संभावना है। भारत और रूस स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, साइंस-टेक्नीक, व्यापार और पोर्ट विकास जैसे क्षेत्रों पर भी बातचीत कर सकते हैं। तमिलनाडु के कुडनकुलम में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की उम्मीद है।

स्किल्ड वर्कर्स और मोबिलिटी पैक्ट की संभावनाएं

युद्ध के बाद रूस में कई क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की कमी बताई जा रही है। रूस चाहता है कि भारत से तकनीकी विशेषज्ञ, मेडिकल स्टाफ, इंजीनियर और अन्य प्रशिक्षित वर्कर्स वहां काम करने आएं। दोनों देशों के बीच एक स्किल डेवलपमेंट और मोबिलिटी पैक्ट पर बातचीत की संभावना बताई जा रही है, जिसके तहत लगभग 10 लाख भारतीय कुशल कामगारों को रूस में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। अभी तक भारत के ऐसे समझौते मुख्य रूप से जर्मनी और इजराइल के साथ हैं।

ऊर्जा सहयोग और तेल खरीद पर चर्चा

यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग एक मुख्य मुद्दा रहने की उम्मीद है। रिपोर्टों के अनुसार पहले भारत रूस से लगभग 2.5% तेल खरीदता था, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद सस्ता तेल मिलने से यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 35% तक पहुंच गया। इससे भारत को लाभ हुआ, हालांकि अमेरिका को यह रुख पसंद नहीं आया और अतिरिक्त टैरिफ जैसी चुनौतियां सामने आईं, जिसके बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद में कमी की।

अब दोनों देश ऐसा भुगतान तंत्र तैयार करने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे ऊर्जा व्यापार पर बाहरी दबावों का असर कम हो। इसके लिए रुपया-रूबल व्यापार, डिजिटल पेमेंट या किसी तीसरे देश के बैंकिंग सिस्टम के उपयोग जैसे विकल्पों पर विचार हो सकता है। साथ ही रूस भारत को आर्कटिक क्षेत्र की ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश का मौका देने पर भी चर्चा कर सकता है।

रक्षा सहयोग, Su-57 और S-500 पर संभावित बातचीत

भारत और रूस के बीच 'स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के तहत लंबे समय से रक्षा और तकनीकी सहयोग चल रहा है। रूस ने संकेत दिया है कि वह Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट और उसकी तकनीक भारत को देने को तैयार है। Su-57 को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के रूप में देखा जाता है और इसे अमेरिकी F-35 के संभावित जवाब के रूप में माना जाता है।

रूस का कहना है कि Su-57 की तकनीक, जिसमें इंजन, रडार, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और आधुनिक हथियारों से जुड़ी जानकारी शामिल है, साझा की जा सकती है और यदि भारत चाहे तो इसे भारत में बनाने के विकल्प पर भी काम हो सकता है। रूस ने दो-सीटर Su-57 के संयुक्त विकास का प्रस्ताव भी दिया है। सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना के पास पहले से 200 से अधिक रूसी लड़ाकू विमान हैं और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड उनकी सर्विसिंग करती रही है, ऐसे में नए रूसी जेट के रखरखाव में भी सुविधा रहेगी।

S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लेकर भी भारत की रुचि बताई जा रही है, क्योंकि यह लंबी दूरी से आने वाली मिसाइलों और हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम माना जाता है।

सबमरीन डील पर सरकारी स्पष्टीकरण

हाल की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भारत ने पुतिन की यात्रा से पहले रूस के साथ 2 अरब डॉलर की नई परमाणु पनडुब्बी डील फाइनल कर ली है। सरकार की फैक्ट एजेंसी पीआईबी फैक्ट चेक ने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच कोई नई डील साइन नहीं हुई है। संबंधित सबमरीन प्रोग्राम का कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2019 में ही हुआ था और डिलीवरी में देरी के कारण नई समयसीमा 2028 तय की गई है।

भारत-अमेरिका और अन्य देशों के साथ संतुलन

रिपोर्टों में कहा गया है कि रूस के साथ बढ़ते ऊर्जा और रक्षा संबंधों के बीच भारत को अमेरिका और यूरोप के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं में संतुलन बनाकर चलना होगा। विश्लेषण के अनुसार भारत को यह संदेश देना है कि वह रूस का भरोसेमंद साझेदार है, लेकिन साथ ही पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को भी नुकसान नहीं पहुंचा रहा।

दोनों नेताओं की हालिया कूटनीतिक बातचीत

पुतिन और मोदी की पिछली मुलाकात चीन के तिआनजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। वर्ष 2024 में मोदी दो बार रूस की यात्रा पर गए, जिनमें जुलाई की दो दिन की यात्रा और अक्टूबर में ब्रिक्स समिट में भागीदारी शामिल रही। उसी दौरान पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया गया था, जिसके जवाब में यह दौरा हो रहा है।

यात्रा का निष्कर्ष और संभावित परिणाम

पुतिन की वर्तमान यात्रा को भारत-रूस रिश्तों के अगले दशक के रोडमैप को आकार देने वाली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी, कुशल कार्यबल और व्यापार में सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के साथ यह दौरा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक संतुलन साधने की नीति की भी महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में समिट के औपचारिक परिणामों और समझौतों से दोनों देशों की भविष्य की साझेदारी की दिशा और स्पष्ट होगी।

Sharad Shrivastava