भारत दौरे पर पुतिन ने तोड़ा कड़ा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आते ही अपने सख्त सुरक्षा नियमों से हटते नजर आए। आमतौर पर दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले प्रोटोकॉल का पालन करने वाले पुतिन ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक ही गाड़ी में सफर कर सबका ध्यान खींचा।
स्पेशल कार छोड़कर मोदी के साथ एक ही गाड़ी में
पुतिन आम तौर पर अपनी खास ऑरस सीनेट कार में यात्रा करते हैं, जिसे रूस से एयरलिफ्ट करके विदेशों में पहुंचाया जाता है। यह कार हाई टेक्नोलॉजी से लैस है और इसे चलता-फिरता किला माना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहुंचने के बाद पुतिन ने एयरपोर्ट पर इस कार का इस्तेमाल नहीं किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक ही गाड़ी में बैठकर रवाना हुए। इसे उनके सिक्योरिटी प्रोटोकॉल में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
चलता-फिरता किला: पुतिन की ऑरस सीनेट
पुतिन की ऑरस सीनेट कार कई तरह की उन्नत सुरक्षा व्यवस्थाओं से लैस है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी भी बड़े हमले की स्थिति में भी यह उन्हें सुरक्षित रख सके। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, कार में ऐसी सुविधाएं हैं कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति बैठे-बैठे ही जवाबी सैन्य या परमाणु हमले का आदेश भी जारी कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे चलता-फिरता किला कहा जाता है।
दुनिया का सबसे सख्त सिक्योरिटी प्रोटोकॉल
रूसी राष्ट्रपति का सिक्योरिटी प्रोटोकॉल दुनिया में सबसे सख्त श्रेणी में गिना जाता है। उनकी सुरक्षा टीम हर छोटी से छोटी बात पर नजर रखती है। उनकी डाइट से लेकर मेडिकल रिपोर्ट तक सब कुछ नियंत्रित प्रक्रिया के तहत ही होता है। यही नहीं, विदेश यात्राओं के दौरान भी उनके लिए खास इंतजाम किए जाते हैं जिनमें किसी भी तरह की गलती की संभावना लगभग न के बराबर होती है।
खाने की जांच के लिए मोबाइल लैब
पुतिन के लिए तैयार होने वाले भोजन की जांच एक विशेष मोबाइल लैब में की जाती है, जिसे रूस से ही साथ लाया जाता है। इस लैब के जरिए खाने में जहर या किसी भी तरह के संदिग्ध केमिकल की मौजूदगी की जांच की जाती है। भोजन को सर्व किए जाने से पहले यह पूरी प्रक्रिया अनिवार्य रूप से अपनाई जाती है, ताकि किसी प्रकार की साजिश की आशंका को खत्म किया जा सके।
मल-मूत्र तक वापस भेजा जाता है
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि विदेश यात्राओं के दौरान पुतिन का मल-मूत्र तक इकट्ठा करके सील्ड बैग में मॉस्को भेजा जाता है। माना जाता है कि इस प्रक्रिया के पीछे उद्देश्य उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को गुप्त रखना और किसी भी देश या एजेंसी द्वारा उनके जैविक नमूनों का दुरुपयोग रोकना है। यह कदम उनके सिक्योरिटी और प्राइवेसी प्रोटोकॉल की कठोरता को दर्शाता है।
अन्य वैश्विक नेताओं से अलग सुरक्षा व्यवस्थाएं
दुनिया के दूसरे बड़े नेताओं जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भी बेहद कड़े सिक्योरिटी प्रोटोकॉल लागू होते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान एयरफोर्स-1 हमेशा रनवे पर तैयार रखा जाता है, और उनके आसपास के इलाकों की गहन जांच की जाती है। हालांकि पुतिन के मामले में निजी जीवन, स्वास्थ्य और मूवमेंट पर नियंत्रण कहीं अधिक कठोर और गोपनीय माना जाता है।
निष्कर्ष: कड़े प्रोटोकॉल के बीच विश्वास का संकेत
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह की जानकारियां सामने आती रही हैं, जो बताती हैं कि उनके लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में भारत पहुंचते ही अपनी स्पेशल कार छोड़कर प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक ही गाड़ी में सफर करना केवल प्रोटोकॉल में ढील नहीं, बल्कि भारत के प्रति भरोसे और रिश्तों की गर्माहट का संकेत भी माना जा रहा है। यह घटना उनकी सख्त सुरक्षा छवि के बीच एक अलग तरह का राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश देती है।
Faraz Khan