राहुल गांधी ने CBSE मूल्यांकन पर उठाए सवाल, छात्रों के भविष्य पर चिंता

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राहुल गांधी ने CBSE मूल्यांकन पर उठाए सवाल, छात्रों के भविष्य पर चिंता

राहुल गांधी ने CBSE परीक्षा मूल्यांकन पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को स्पष्टता प्रदान करनी चाहिए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

छात्रों के भविष्य की चिंता

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए समय निकालते हैं, लेकिन जब शिक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं, तो सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिलता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई तकनीकी खामी है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।

हाल के दिनों में, सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच परीक्षा मूल्यांकन की विश्वसनीयता को लेकर बहस छिड़ गई है।

अभिभावकों और छात्रों की मांग

राहुल गांधी ने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं लाखों छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया पर संदेह छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ा सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि आवश्यक हो, तो स्वतंत्र जांच कराई जाए।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद शिक्षा प्रणाली और परीक्षा सुधारों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जबकि सरकार और शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती हैं।

कई अभिभावकों ने परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, तो उसकी प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के बारे में जानकारी साझा की जानी चाहिए।

फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित अधिकारी और सरकार इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।

Pushpendra Chaubey