रायसेन की अवैध शराब फैक्ट्री पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के ग्राम चांदौड़ा में पकड़ी गई अवैध शराब फैक्ट्री के मामले ने राजनीतिक तकरार का रूप ले लिया है। भाजपा के पूर्व विधायक रामपाल सिंह ठाकुर और कांग्रेस के मौजूदा विधायक देवेंद्र पटेल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुली चुनौती दे रहे हैं।
पूर्व विधायक रामपाल का आरोप: कांग्रेस संरक्षण में फैक्ट्री
रायसेन जिले की इस अवैध शराब फैक्ट्री के खुलासे के बाद 19 दिसंबर को भोपाल में पूर्व भाजपा विधायक रामपाल सिंह ठाकुर ने प्रेसवार्ता की। उन्होंने दावा किया कि चांदौड़ा में चल रही अवैध शराब फैक्ट्री कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल के संरक्षण में फल-फूल रही थी।
रामपाल सिंह ने इस प्रकरण को कांग्रेस और शराब माफियाओं के बीच सांठगांठ का उदाहरण बताते हुए कहा कि सत्ता का दुरुपयोग कर अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनके अनुसार, यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण का मामला है।
वर्तमान विधायक पटेल का पलटवार और खुली चुनौती
इन आरोपों के जवाब में सिलवानी क्षेत्र के वर्तमान कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल ने प्रेस के माध्यम से कड़ा पलटवार किया। पटेल ने आरोप लगाया कि रामपाल सिंह स्वयं 1990 से सुल्तानगंज में स्थापित हैं और जिस राजघराने की संपत्ति में शराब फैक्ट्री पकड़ी गई, उससे उनके पुराने संबंध रहे हैं।
पटेल का कहना है कि पूरे रायसेन जिले में शराब के ठेके और अवैध शराब की बिक्री के पीछे रामपाल सिंह का नेटवर्क सक्रिय है। उन्होंने दावा किया कि गांवों में खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है और यह सब लंबे समय से हो रहा है।
भाजपा सरकार पर भी निशाना
देवेंद्र पटेल ने राज्य की भाजपा सरकार पर भी आरोप लगाए कि रायसेन के आदिवासी क्षेत्रों में अवैध शराब के खिलाफ लगातार विरोध और प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उनके अनुसार, प्रशासन की ढिलाई और राजनीतिक संरक्षण की वजह से यह कारोबार फैलता गया।
इस्तीफे की पेशकश और मानहानि की चेतावनी
अपने बचाव में विधायक पटेल ने कहा कि यदि रामपाल सिंह उनके खिलाफ लगाए गए किसी भी एक आरोप को भी प्रमाणित कर दें, तो वह तुरंत राजनीति से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत साख पर लगने वाले दाग के रूप में बताते हुए गंभीर चुनौती के रूप में पेश किया।
पटेल ने यह भी कहा कि चुनाव हारने के बाद रामपाल सिंह का मानसिक संतुलन और राजनीतिक समझ गड़बड़ा गई है, जिसके चलते वे बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूर्व विधायक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो वे उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कर अदालत में कानूनी कार्रवाई करेंगे।
निष्कर्ष: शराब फैक्ट्री से मुद्दा पहुंचा सियासी टकराव तक
रायसेन जिले में अवैध शराब फैक्ट्री का मामला अब कानून-व्यवस्था के दायरे से निकलकर तेज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल चुका है। एक ओर भाजपा के पूर्व विधायक इसे कांग्रेस और शराब माफिया की मिलीभगत बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस विधायक न केवल इसका खंडन कर रहे हैं, बल्कि आरोपों को उलटकर भाजपा नेता पर ही निशाना साध रहे हैं।
इस्तीफे की चुनौती, मानहानि के मुकदमे की चेतावनी और सरकार की भूमिका पर सवालों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। अब देखना होगा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी तय होती है और क्या दोनों नेताओं के आरोपों की पुष्टि हो पाती है या नहीं।
Sharad Shrivastava