SC की सख्ती कचरा प्रबंधन में कलेक्टरों को सीधी पावर, ऑन स्पॉट जुर्माना

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कचरा प्रबंधन में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर: भोपाल केस में SC की सख्ती, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना; सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: कचरा प्रबंधन के लिए कलेक्टरों को मिलेंगे सीधे अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग के मामले में देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि कचरा प्रबंधन के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने की योजना बनाई जाएगी, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके।

सभी राज्यों से मांगा गया रोडमैप

कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि 22 मई को होने वाली अगली सुनवाई तक कलेक्टरों को पावर देने का रोडमैप, कचरा छंटाई और प्रोसेसिंग की योजना, तथा पेनाल्टी और मोबाइल कोर्ट की व्यवस्था पर ठोस रिपोर्ट पेश करें।

भोपाल के केस का संदर्भ

दरअसल, भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लगने वाली आग को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे ने मार्च 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इस पर 31 जुलाई 2023 को भोपाल नगर निगम पर 1 करोड़ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। जुर्माने के खिलाफ निगम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 16 मई 2025 से सुनवाई चल रही है। इस केस में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

देशभर के मुख्य सचिवों को तलब

डॉ. सुभाष सी. पांडे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ भोपाल या इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की समस्या है। इस सुनवाई में देश के विभिन्न मुख्य सचिवों को बुलाया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है, जिससे स्वच्छ भारत अभियान पूरी तरह से लागू नहीं हो सकेगा। कुछ मुख्य सचिवों ने अपनी समस्याएं भी बताईं और कहा कि वे नया प्लान बना रहे हैं।

मुख्य सचिवों की सहमति

डॉ. पांडे के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि 1 साल के लिए पर्यावरण संरक्षण 1986 की धारा 5 के अधिकार कलेक्टरों को दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और निगम से अधिकार लेकर कलेक्टरों को सशक्त किया जाएगा। सभी मुख्य सचिवों ने इस पर सहमति जताई है।

पिछली सुनवाई के महत्वपूर्ण बिंदु

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 1 अप्रैल से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 लागू हो जाएंगे। नए नियम देश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या की पहचान करने और उसे हल करने के तरीके में पूरी तरह से शामिल हैं। इन नियमों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए, ऐसे निर्देश जारी करना सही समझा गया है जो न केवल भोपाल नगर निगम बल्कि पूरे देश पर लागू हों, क्योंकि स्थानीय निकायों द्वारा SWM रूल्स, 2016 के अनुपालन की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

सालाना रिपोर्ट में चिंताजनक स्थिति

कोर्ट ने उल्लेख किया कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना रिपोर्ट 2021-2022 के अनुसार, देश में हर दिन लगभग 1.70 लाख टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (TPD) पैदा होता है। भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में कलेक्शन एफिशिएंसी में सुधार हुआ है, लेकिन प्रोसेसिंग की दर अभी भी एक बड़ी रुकावट है। बिना प्रोसेस किया गया कचरा अक्सर वैज्ञानिक लैंडफिल या पुरानी डंपसाइट में चला जाता है।

तत्काल अनुपालन की आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि आज की पीढ़ी मौजूदा लागू करने की कमियों के बने रहने तक और ज्यादा कानूनी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती। पुराने कचरे के जमा होने, भूजल और हवा के प्रदूषण के लिए 1 अप्रैल से लागू मौजूदा आदेशों का तत्काल पालन करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार प्रतिनिधि समय की जरूरतों के हिसाब से जवाब देने वाले होते हैं और नियम आसान हैं जिन्हें स्थानीय निकायों के प्रशासन, कॉरपोरेटर, काउंसलर/मेयर, उनके अध्यक्षों और वार्ड सदस्यों को थोड़ी भागीदारी से सीखने और लागू करने की जरूरत है।

भोपाल की ग्राउंड रियलिटी

तीन दिन पहले भी आदमपुर खंती में आग लग चुकी थी। खंती में डंप लिगेसी वेस्ट के निपटारे का काम शुरू करने के लिए एक दिन पहले ही पूजा की गई थी। आग लिगेसी वेस्ट के साथ नए ड्राय वेस्ट में भी लगी थी, जिसका उपयोग एनटीपीसी के प्लांट में टोरिफाइड चारकोल बनाने में होना था। आग के कारण इलाके में धुआं फैल गया था और ग्रामीण परेशान हुए थे। साइट पर 6.5 से 7.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट जमा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने 26 मार्च को सौराष्ट्र एन्वायरो प्राइवेट लिमिटेड को वर्क ऑर्डर जारी किया है। कंपनी को इसके लिए 55 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

Ravi Yadav