संघ के 100 साल पर मोहन भागवत का संबोधन

· 1 min read
संघ के 100 साल  पर मोहन भागवत का संबोधन

RSS के 100 साल पूरे: मोहन भागवत का महत्वपूर्ण संबोधन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने संघ के प्रति विरोध और स्वयंसेवकों के समाज के प्रति प्रेम पर चर्चा की।

संघ के विरोध और समाज सेवा पर विचार

भागवत ने कहा कि संघ का जितना विरोध हुआ है, उतना किसी संगठन का नहीं हुआ। इसके बावजूद स्वयंसेवक समाज के प्रति निस्वार्थ प्रेम और सेवा जारी रखते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों को नेक लोगों से दोस्ती करने और गलत काम करने वालों के प्रति क्रूरता के बजाय करुणा दिखाने की सलाह दी।

कार्यक्रम की विशेषताएं और विचार

RSS की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर आयोजित इस कार्यक्रम में 1300 लोगों को आमंत्रित किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ-साथ सभी धर्मों और वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। भागवत ने हिंदू राष्ट्र की समावेशी परिभाषा और समाज के समग्र संगठन की जरूरत पर जोर दिया।

संघ की भविष्य दृष्टि

भागवत ने संघ के इतिहास, दृष्टिकोण और समाज के प्रति उसकी भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने भारत की विश्वगुरु बनने की संभावना पर भी विचार रखे। कार्यक्रम का उद्देश्य संघ के विचारों को स्पष्ट करने और सभी धर्मों एवं वर्गों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है।

इस आयोजन ने संघ की शताब्दी यात्रा को दर्शाते हुए समाज में एकता और सह-अस्तित्व की नई संभावनाओं को बढ़ाने का प्रयास किया।