सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौतों पर सख्त टिप्पणी की
सुप्रीम कोर्ट ने कस्टोडियल हिंसा और हिरासत में मौतों को लेकर इसे सिस्टम पर धब्बा बताया और कहा कि देश अब इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
राजस्थान में 2025 के पहले 8 महीनों में 11 मौतें
कोर्ट को बताया गया कि राजस्थान में 2025 के पहले 8 महीनों में हिरासत में 11 मौतें हुई हैं, जिनमें से 7 मामले उदयपुर डिवीजन से संबंधित थे। बेंच ने सवाल किया कि कस्टडी में मौतें कैसे होने दी जा सकती हैं।
केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि उसने अब तक हलफनामा क्यों नहीं दाखिल किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि कस्टोडियल मौतें किसी भी रूप में बचाव योग्य नहीं हैं और केंद्र जल्द ही हलफनामा दाखिल करेगा।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी
बेंच ने सभी शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन हफ्ते का अंतिम समय दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित राज्यों के गृह विभाग के प्रमुख सचिव और केंद्रीय एजेंसियों के डायरेक्टर अदालत में पेश होंगे।
मध्य प्रदेश की सराहना
अमाइकस क्यूरी सिद्धार्थ दवे ने बताया कि मध्य प्रदेश ने सभी पुलिस थानों और चौकियों को जिला नियंत्रण कक्ष से जोड़ा है। बेंच ने इसे काबिल-ए-तारीफ कदम बताया। राज्य में 1100 थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और इनकी निगरानी भोपाल से की जा रही है।
मामले की अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। पिछली सुनवाई में सुझाव दिया गया था कि सीएसआर फंड का उपयोग करके निजी जेलें विकसित की जा सकती हैं।
Bhavanesh Soni