सुप्रीम कोर्ट: RTI एक्टिविज्म अब <बिजनेस> बन गया है, <सरकार> अपने काम का ध्यान खुद रख लेगी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को RTI एक्टिविज्म को एक नया <बिजनेस> बताया। कोर्ट ने यह टिप्पणी RTI कार्यकर्ता राकेश बेहल और उसके सहयोगी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की। दोनों पर सड़क निर्माण में बाधा डालने और मजदूरों को धमकाने का आरोप था।
'आप <निगरानी> करने वाले कौन होते हैं?'
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा, "इन सड़कों के निर्माण की <निगरानी> करने वाले आप कौन होते हैं? आप कौन सी <अथॉरिटी> हैं? आपको ये अधिकार किसने दिए हैं।" इससे पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
RTI एक्टिविज्म का <अर्थ> और <दुरुपयोग>
RTI (सूचना का अधिकार) कानून का उपयोग सरकारी कामकाज में <पारदर्शिता> लाने, <भ्रष्टाचार> उजागर करने और जवाबदेही तय करने के लिए किया जाता है। इसे 'RTI एक्टिविज्म' कहते हैं। इसके तहत सामाजिक कार्यकर्ता या आम नागरिक जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकारी विभागों से जानकारियां मांगते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में इसके <दुरुपयोग> के मामले भी सामने आए हैं, जिनमें अधिकारियों को डराने या ब्लैकमेल करने का प्रयास किया गया है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री <अरविंद केजरीवाल> ने भी RTI के जरिए <भ्रष्टाचार> उजागर कर पहचान बनाई थी, जिसके लिए उन्हें 2006 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार मिला था।
इससे पहले 5 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने <जनहित याचिका> (PIL) को <प्राइवेट इंटरेस्ट>, <पब्लिसिटी इंटरेस्ट>, <पैसा इंटरेस्ट> और <पॉलिटिकल इंटरेस्ट> लिटिगेशन करार दिया था। कोर्ट ने <सबरीमाला> मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली एक PIL के <मकसद> पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने कहा था कि PIL कानून की प्रक्रिया का <दुरुपयोग> है।
Navjeet Kaur