सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: 'ED के काम में बाधा आई, तो एजेंसी को खुद रास्ता निकालना होगा'

· 1 min read
सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: 'ED के काम में बाधा आई, तो एजेंसी को खुद रास्ता निकालना होगा'

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: 'ED के काम में बाधा आई, तो एजेंसी को खुद निकालना होगा रास्ता'

सुप्रीम कोर्ट ने ED के कामकाज में बाधा डालने के मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका का विरोध किया, जिसमें ED की याचिका का विरोध किया जा रहा था। यह मामला आइपैक पर ED के छापे के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वहां जाकर बाधा डालने से संबंधित है। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि किसी मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई में दखल दिया जाता है और एजेंसी को इसके खिलाफ याचिका लगाने का अधिकार नहीं है, तो एजेंसी के पास क्या उपाय होगा?

केंद्रीय एजेंसी के अधिकार पर सवाल

जस्टिस पी.के. मिश्र और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने ये टिप्पणियां उस वक्त कीं जब बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ED की याचिका का विरोध कर रहे थे। दीवान ने दलील दी कि ED सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती। इस पर पीठ ने पूछा कि केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में बाधा डालने जैसी असामान्य परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, क्योंकि इस याचिका के मुताबिक मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित सरकारी कार्यालय में जबरदस्ती प्रवेश किया। अगर अनुच्छेद 32 या अनुच्छेद 226 में याचिका मान्य नहीं है, तो निर्णय कौन लेगा? किसी दिन कोई अन्य मुख्यमंत्री किसी अन्य कार्यालय में प्रवेश कर सकता है। शून्यता की स्थिति नहीं रह सकती।

दोनों पक्षों की दलीलें

दीवान ने अपनी दलील दोहराई कि ED अनुच्छेद 32 और 226 में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में याचिका नहीं कर सकती, क्योंकि वह कोई न्यायिक इकाई नहीं बल्कि केंद्र सरकार का एक विभाग है। ममता बनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने भी कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका मौलिक अधिकार के उल्लंघन पर दाखिल की जाती है और इस मामले में ED के किस मौलिक अधिकार का हनन हुआ है, यह स्पष्ट नहीं है। सिब्बल ने यह भी सवाल उठाया कि ED CBI को केस दर्ज करने का आदेश कैसे मांग सकती है।

इसके जवाब में, ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ED ने यह याचिका संरक्षक के तौर पर दाखिल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ED इस मामले में शिड्यूल अपराध की बात नहीं कर रही है, बल्कि ED के छापे के दौरान मुख्यमंत्री के वहां पहुंचकर बाधा डालने के मामले की CBI द्वारा जांच और केस दर्ज करने की मांग कर रही है।

स्थगन की मांग खारिज, कोर्ट की फटकार

सुनवाई की शुरुआत में ही, बंगाल सरकार की ओर से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया। दीवान ने कहा कि ED ने जो प्रत्युत्तर दाखिल किया है, उसमें कई नई चीजें हैं, जिनका जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि यह सिर्फ सुनवाई स्थगित कराने की चाल है, क्योंकि प्रत्युत्तर चार हफ्ते पहले दाखिल किया गया था। कोर्ट ने स्थगन के लिए मना कर दिया।

इसके बाद दीवान ने मांग की कि पहले याचिका की सुनवाई योग्यता पर विचार किया जाए और मेरिट पर बाद में सुनवाई की जाए, या फिर कोर्ट उन अंशों को स्वीकार न करे जो ED के प्रत्युत्तर में नए दिए गए हैं। इन पर कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप कोर्ट को निर्देशित नहीं कर सकते। जो चीज रिकॉर्ड पर है कोर्ट उस पर विचार करेगा। मामले में मंगलवार को फिर सुनवाई होगी। ज्ञात हो कि ED ने इस मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल कर कोलकाता में आइपैक के यहां छापे के दौरान ममता बनर्जी के बाधा डालने और दस्तावेज ले लेने के मामले में केस दर्ज किए जाने की मांग की है।

Arvind Vishwakarma