सुप्रीम कोर्ट ने देवा पारदी केस में पुलिस और सीबीआई पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश के गुना जिले में चर्चित देवा पारदी की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीआई और राज्य सरकार की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई। देवा पारदी की 15 जुलाई 2024 को पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित न करने और उनकी गिरफ्तारी में देरी पर सवाल उठाए हैं।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी सख्त चेतावनी
देवा पारदी की मां द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ सुनवाई कर रही थी। पीठ ने 15 मई 2025 को सीबीआई को आदेश दिया था कि घटना के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार किया जाए। इसके बावजूद, सीबीआई अभी तक आरोपित पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
गिरफ्तारी में देरी पर सीबीआई को फटकार
गुरुवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के इस दावे को नकार दिया कि वे आरोपियों का पता नहीं लगा पा रहे हैं। सीबीआई ने बताया कि उन्होंने आरोपियों की निगरानी, वित्तीय लेन-देन पर नजर रखने और अन्य माध्यमों से तलाश की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने इसे "दिखावा" करार दिया और कहा कि सीबीआई और राज्य सरकार आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
आरोपियों को वेतन और जमानत पर सवाल
याचिकाकर्ता की वकील पायोशी रॉय ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों को फरार होने के बावजूद वेतन मिल रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि एक आरोपी ने ग्वालियर में अपनी अग्रिम जमानत याचिका में हस्ताक्षर और नोटरी की थी। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार और सीबीआई से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के गिरफ्तारी आदेश के बावजूद आरोपी अग्रिम जमानत कैसे ले सकते हैं।
राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल
न्यायमूर्ति महादेवन ने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि भले ही जांच सीबीआई को सौंपी गई हो, लेकिन राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
मामले की अगली सुनवाई
राज्य के स्थायी वकील ने अदालत से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुक्रवार सुबह 10 बजे तक स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, "हम देखेंगे कि कल मध्य प्रदेश राज्य क्या जवाब देता है। सबसे अच्छा यही होगा कि आप आरोपियों को गिरफ्तार कर लें।"
घटना का विवरण
यह मामला 15 जुलाई 2024 का है। देवा पारदी, जो अपनी बारात की तैयारी कर रहा था, को पुलिस ने एक चोरी के मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। अगले दिन, उसकी मौत की सूचना परिजनों को दी गई। इस घटना ने व्यापक जनआक्रोश और कानूनी विवाद को जन्म दिया।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को जारी रहेगी, जहां राज्य सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।