तालिबान और भारत में नई कूटनीति, पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

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तालिबान और भारत  में नई कूटनीति, पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

तालिबान और भारत में नई कूटनीति: पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी इन दिनों भारत दौरे पर हैं। यह दौरा 16 अक्टूबर तक चलेगा। इस पहल को दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। भारत ने तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत और संबंध सुधारने की कोशिशें जारी हैं।

भारत-अफगानिस्तान संबंधों में नया अध्याय

मुत्तकी और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच मानवीय सहायता, व्यापार, वीजा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत ने लंबे समय से अफगानिस्तान में बैकडोर डिप्लोमेसी को जारी रखा है और इसे अब औपचारिक रूप देने की तैयारी हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय समीकरण

भारत ने हाल ही में मॉस्को में आयोजित 'मॉस्को फॉर्मेट कंसल्टेशन' में भाग लिया, जहां उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अफगानिस्तान में बगराम एयरबेस पर नियंत्रण की मांग का विरोध किया। इस विरोध ने भारत को तालिबान, रूस और चीन के करीब लाने का काम किया है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि अफगानिस्तान पर उसके प्रभाव में कमी आ सकती है।

भारत के लिए अवसर और चुनौतियां

भारत और अफगानिस्तान के बीच बातचीत से तालिबान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की दिशा में एक रास्ता खुल सकता है। यह भारत के लिए एक मौका है कि वह तालिबान को अपने पक्ष में कर सके और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर गारंटी ले सके। यह दौरा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम साबित हो सकता है।

अंततः, तालिबान और भारत के बीच बढ़ते संबंध दक्षिण एशिया की राजनीति को नया मोड़ देंगे। भारत को सतर्कता के साथ इस अवसर का लाभ उठाना होगा।