ट्रम्प की धमकी के बाद ईरान पीछे, फांसी टली; भारत ने नागरिकों को लौटने कहा

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ट्रम्प की धमकी के बाद ईरान पीछे, फांसी टली; भारत ने नागरिकों को लौटने कहा

ट्रम्प की चेतावनी के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारी की फांसी टाली, हालात पर वैश्विक चिंता

अमेरिका की धमकी के बाद ईरान का रुख नरम

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनियों के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों को तेजी से फांसी देने की घोषित योजना से पीछे हटने का संकेत दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने फॉक्स न्यूज के एक कार्यक्रम में दिए इंटरव्यू में कहा कि लोगों को फांसी देने की कोई योजना नहीं है और फांसी का सवाल ही नहीं उठता। ट्रम्प ने भी दावा किया कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं फिलहाल रुक गई हैं।

इरफान सुलतानी की फांसी फिलहाल टली

ईरान सरकार ने पहले घोषणा की थी कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों पर फास्ट-ट्रैक ट्रायल चलाकर उन्हें जल्द फांसी दी जाएगी। इसी के तहत 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को फांसी दी जानी थी। द गार्डियन के मुताबिक, सुलतानी को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया और 11 जनवरी को मौत की सजा सुनाई गई। उन पर मोहरेबेह, यानी भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जिसकी सजा ईरानी कानून में मौत है। रिपोर्टों में कहा गया कि उन्हें न तो उचित ट्रायल मिला, न वकील, न ही अपील का अवसर। मानवाधिकार संगठनों और निर्वासित कार्यकर्ताओं ने इसे फास्ट-ट्रैक या शो ट्रायल बताकर हजारों अन्य प्रदर्शनकारियों में डर फैलाने की कोशिश करार दिया। हालांकि, ताजा घटनाक्रम में सुलतानी की फांसी टलने की बात कही गई है।

ईरान और ट्रम्प के बीच परस्पर धमकियां

तनाव के बीच ईरान ने अपने सरकारी टीवी चैनल पर राष्ट्रपति ट्रम्प को जान से मारने की सीधी धमकी जारी की। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसारित संदेश पर्शियन भाषा में था और इसमें 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में ट्रम्प पर हुए हमले की फुटेज दिखाई गई, जिसके साथ लिखा था कि इस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी। इसे तेहरान की ओर से ट्रम्प के खिलाफ अब तक की सबसे सीधी धमकी बताया जा रहा है। इससे पहले ट्रम्प कई बार चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर क्रूर दमन जारी रखता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ईरान फांसी की सजा लागू करता है तो हालात बेहद गंभीर हो जाएंगे।

रजा पहलवी पर ट्रम्प की टिप्पणी

ट्रम्प ने ईरानी विपक्षी नेता और क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को लेकर भी टिप्पणी की। रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि उन्हें रजा पहलवी अच्छे लगते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें ईरान के भीतर कितना समर्थन मिलेगा और वे वहां नेतृत्व संभाल पाएंगे या नहीं। ट्रम्प ने यह भी जोड़ा कि उन्हें नहीं पता कि ईरानी जनता पहलवी के नेतृत्व को स्वीकार करेगी या नहीं, पर यदि ऐसा होता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।

ईरान में अस्थायी नो फ्लाई जोन और उड़ानों पर असर

विस्तृत विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने बुधवार को लगभग दो घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र अधिकांश उड़ानों के लिए बंद कर दिया। फ्लाइटराडार24 के अनुसार, तेहरान ने शाम 5 बजे के तुरंत बाद नोटिस टू एयर मिशन्स (नोटम) जारी कर ईरान से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को छोड़कर बाकी उड़ानों पर रोक लगा दी। यह कदम उस समय उठाया गया, जब अमेरिका ने कतर स्थित अपने कुछ ठिकानों से कर्मियों को वापस बुलाना शुरू किया और ईरान ने चेताया कि यदि वॉशिंगटन हमला करता है तो वह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

इस अस्थायी बंदी और क्षेत्र में मिसाइल व ड्रोन हमलों के खतरे के कारण कई एयरलाइनों ने ईरान के हवाई क्षेत्र से बचने का निर्णय लिया। इंडिगो, लुफ्थांसा और एयरोफ्लोट सहित कई कंपनियां प्रभावित हुईं। इंडिगो ने बताया कि ईरान के अचानक फैसले से उसकी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जबकि एयर इंडिया ने कहा कि जो उड़ानें सामान्यतः ईरान के ऊपर से गुजरती थीं, उन्हें अब वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है, जिससे देरी की संभावना बढ़ गई है।

भारत और अन्य देशों की एडवाइजरी

ईरान में बिगड़ती स्थिति के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की। इसमें छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों सहित सभी भारतीयों से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने को कहा गया। अनुमान है कि वर्तमान में ईरान में 10 हजार से अधिक भारतीय मौजूद हैं। यह सलाह 5 जनवरी की पिछली एडवाइजरी का विस्तार है और बदलते हालात को ध्यान में रखकर जारी की गई है।

भारत ने नागरिकों को प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूर रहने, स्थानीय मीडिया पर नजर रखने और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने की सलाह दी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी देर शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर ताजा हालात पर चर्चा की। भारत के अलावा स्पेन, इटली और पोलैंड ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।

ईरान में दमन, फांसियां और मौतों के दावे

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा देश है जहां सजा के तौर पर सबसे अधिक लोगों को फांसी दी जाती है। नॉर्वे स्थित ईरान मानवाधिकार समूह के मुताबिक, पिछले वर्ष ईरान में कम से कम 1,500 लोगों को फांसी दी गई।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में बुधवार शाम लगभग 300 शवों को दफनाने की तैयारी थी, जिनमें प्रदर्शनकारियों के साथ सुरक्षा बलों के शव भी शामिल बताए गए। यह कार्यक्रम कड़ी सुरक्षा के बीच तेहरान विश्वविद्यालय परिसर में होने की संभावना व्यक्त की गई। नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स संगठन ने दावा किया कि प्रदर्शनों पर कार्रवाई के दौरान ईरानी सुरक्षा बलों ने कम से कम 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला और 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

ईरान से जुड़े मुद्दों को कवर करने वाली वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने इससे भी बड़ा दावा किया कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है, जिनमें से अधिकांश गोली लगने से मारे गए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया, लेकिन इन्हें स्थिति की गंभीरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

न्यायपालिका का रुख और फास्ट ट्रायल की वकालत

ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने पहले यह संकेत दिया था कि सरकार को हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ फास्ट ट्रायल और त्वरित फांसी के जरिए कार्रवाई करनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि सजा में दो-तीन महीने की देरी होती है तो उसका असर कम हो जाता है, इसलिए कदम जल्दी उठाने होंगे। इस बयान को दमनात्मक कार्रवाई को तेज करने की सोच के रूप में देखा गया।

आर्थिक संकट, जन असंतोष और रजा पहलवी को लेकर मांग

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बने और 1989 तक पद पर रहे। इसके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक सर्वोच्च पद संभाल रहे हैं। इस लंबे दौर में देश आर्थिक संकट, महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा अवमूल्यन और लगातार जन आंदोलनों जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है।

लगभग 47 वर्षों बाद मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक स्थिति से नाराज लोगों का एक वर्ग बदलाव की मांग कर रहा है। कई प्रदर्शनकारी 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखते हैं। खासकर युवाओं और जेनरेशन जेड के बीच यह धारणा है कि यदि पहलवी के नेतृत्व में बदलाव होता है तो ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है। हालांकि, यह मांग अभी भी विवादित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई है।

प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए हिंसक प्रदर्शन कई कारणों के संयोजन से भड़के और इन्हें हाल के वर्षों के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में गिना जा रहा है। व्यापक दमन, संभावित फांसी की सजा, आर्थिक तंगी और राजनीतिक असंतोष ने मिलकर स्थिति को और जटिल बना दिया है।

कुल मिलाकर, ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव, विशेषकर अमेरिका की चेतावनियों और मानवाधिकार संगठनों की आलोचना के बीच, सरकार ने फिलहाल कुछ कदम पीछे लिए हैं, लेकिन जमीनी हालात, राजनीतिक भविष्य और विरोध प्रदर्शनों का रुख अभी अनिश्चित बना हुआ है।

Ravi Yadav