ट्रंप का चाबहार पोर्ट प्रतिबंध हटाने का बड़ा फैसला
अमेरिका ने भारत को चाबहार पोर्ट के संचालन के लिए प्रतिबंधों से छह महीने की छूट देने की घोषणा की है। यह छूट 29 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी हो गई है। चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा व्यापारिक मार्ग प्रदान करता है।
चाबहार पोर्ट का रणनीतिक महत्व
चाबहार पोर्ट भारत के अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का हिस्सा है, जो माल ढुलाई की लागत में 30% और समय में 40% तक की कमी लाने में मदद करता है। यह चीन के ग्वादर पोर्ट का सीधा जवाब है, जो पाकिस्तान में स्थित है और चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का हिस्सा है। इस पोर्ट के माध्यम से भारत क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा में अपनी स्थिति मजबूत करता है।
अमेरिका के फैसले के पीछे की रणनीति
अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंध हटाने का फैसला मुख्य रूप से दो कारणों से किया है। पहला, भारत को अपनी तरफ करना और दूसरा, चीन पर दबाव बनाना। हाल ही में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ट्रेड डील को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें अमेरिका ने चीन पर टैरिफ कम करने का प्रस्ताव रखा, जबकि चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीदने की बात की। इस संदर्भ में, भारत को एक रणनीतिक साझेदार बनाना अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
अमेरिका के इस कदम से भारत को राहत मिली है, क्योंकि चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंध भारत के लिए चिंता का बड़ा कारण था। अब यह प्रतिबंध हटने से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए सकारात्मक संकेत मिलते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस कूटनीतिक अवसर का कैसे उपयोग करता है।
Arvind Vishwakarma