संत और सियासतदान का संवाद, संदेश और सवाल
महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी जो अपनी विलक्षण प्रतिभा से दूसरे राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश खासतौर से भाजपा और संघ में लोकप्रिय और स्वीकार्य अचानक उनका गुस्सा सामने आना और बिफ़र जाना अपने पीछे न सिर्फ संदेश बल्कि कई सवाल भी छोड़ गया..समाजसेवियो और सियासतदानों के मंच से उत्तम स्वामी की नाराजगी से ज्यादा उनके तेवर और चेहरे की भाव भंगिमाएं यह बताने के लिए काफी थीं कि या उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई या फिर उनका भरोसा किसी अपने से अचानक टूट गया..शायद उनका संयम और धैर्य तब जवाब दे गया जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हें अपने साथ कार्यक्रम के मंच पर नजर नहीं आए..इंतजार जवाब दे गया और फिर संयम तोड़ एक संत ने मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सियासत दान को लेकर जो कुछ कहा वह किसी से छुपा नहीं कितना उचित अनुचित तरह-तरह की चर्चा के बीच इसका आकलन जरूर शुरू हो गया..स्वामी ने जिन शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की उसे अंततः वीडियो कांफ्रेंस के जरिए कार्यक्रम में जुड़ गए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने यह कहकर शिरोधार्य किया कि शरद पूर्णिमा के मौके पर रात का बिना इंतजार किया दिन में ही उन्हें अमृत वचन मिल गया..एक और स्वामी का दुर्वासा ऋषि के तौर पर सामने आना तो दूसरी ओर अपनी बेबाक टिप्पणी और बिना लाग लपेट के अपनी बात कहने वाले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पद पावर प्रतिष्ठा को नजरअंदाज कर स्वामी के उलाहना और उनके कोसने को दिल पर नहीं लिया..स्वामी की बात उन्होंने सुन ली थी और इसलिए एक परिपक्व राजनेता के तौर पर उन्होंने संत की जमकर तारीफ की और तालियां बजवाई लेकिन इतना जरूर साफ कर दिया कि कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी को लेकर उन्होंने वस्तु स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी थी. चिर परिचित मुस्कान के साथ मोहन ने स्वामी के सम्मान सहयोग और उनके द्वारा समय-समय पर मिलते रहे मार्गदर्शन को याद कर स्वामी के गुस्से को शांत कर ही दिया.स्वामी संग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की संयुक्त तस्वीर कुछ दिन पहले ही कामाख्या मंदिर के दरबार से सामने आई थी..दोनों की निकटता से मध्य प्रदेश अनजान नहीं..संघ के एक वरिष्ठ नेता सुमित भाजपा के कई नेताओं से स्वामी के गुरु शिष्य के आत्मीय रिश्ते पिछले दो दशक से सार्वजनिक मंच पर नजर आते रहे..पिछले दिनों मंत्री प्रहलाद पटेल की पुस्तक के विमोचन मंच से संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत की मौजूदगी में उत्तम स्वामी का..परिक्रमा लगा कर राजनीति करने वालों पर किया गया तंज और व्यंग खूब चर्चा का विषय बना था.. उस वक्त भागवत मुस्कुराए थे और अपने अंदाज में किस्सा कहानी के जरिए राजनेताओं के लिए बड़ा संदेश छोड़ गए थे..सलकनपुर के मंच से भी शरद पूर्णिमा के विशेष कार्यक्रम पर उत्तम स्वामी ने एक बार फिर परिक्रमा की आड़ में राजनेताओं को यह कहकर सोचने को मजबूर किया..कि हम तो भगवान की नीति पर चलने वाले लोग हैं जिनका राजनीति करना है वह परिक्रमा करें प्रशंसा करें.उत्तम स्वामी के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से व्यक्तिगत रिश्ते बहुत प्रगाढ़ और मधुर रहे होंगे...ऐसे में स्वामी की अपेक्षाएं बढ़ना लाजमी और इसलिए मुख्यमंत्री ने भी बड़ी विनम्रता और हास परिहास के माहौल में ही लेकिन वक्त की नजाकत और मंच की गंभीरता को समझा..कमिश्नर कलेक्टर कान्फ्रेंस की व्यस्तता और समय अभाव ने मुख्यमंत्री को शायद अपनी प्राथमिकता तय करने के लिए मजबूर किया..ऐसे में उत्तम स्वामी का गुस्सा अपनी जगह लेकर सार्वजनिक मंच से प्रदेश के मुख्यमंत्री के बारे में बहुत कुछ बोल देना यह उनका हक हो सकता है और मार्गदर्शन देने का तरीका लेकिन इसे टाला भी जा सकता था..संघ के दो बड़े शीर्ष नेताओं से अपने व्यक्तिगत संबंध को यदि स्वामी ध्यान रखते तो शायद बड़प्पन दिखा सकते थे.
उत्तम स्वामी की नाराजगी
आप मुख्यमंत्री तक बात पहुंचाए...मुख्यमंत्री को आना था लेकिन क्या पता उनकी इच्छा कुछ बाधा आ रही होगी...कुछ काम आया होगा हमने तो कोई बात करी नहीं...तपन जी भाईसाब ने बात करी थी...हमने निमंत्रण भी नहीं दिया...निमंत्रण तपन भौमिक जी ने दिया..नहीं अभी जोड़ने की जरूरत नहीं है...कोई जरूरत नहीं है जुड़ने की..जिनके पास 2 घंटे ऐसे सेवा प्रकल्प में नहीं है...तो ऐसा व्यक्ति हमारे मंच पर नहीं चाहिए...चाहे कोई भी हो...कोई भी हो हमको नहीं चाहिए...वो आपको राजनीति करना होगा...हम तो भगवान की नीति कर चलने वाले लोग हैं...जिनको राजनीति करना वो परिक्रमा करें प्रशंसा करें...उनको जोड़ने हम उनको यहां से नमन करते हैं...आपको आने की जरुरत नहीं है...मेरी मां भगवती बैठी है।
सीएम और उत्तम स्वामी के बीच संवाद
सीएम- आप तो कृपावंत हैं।
उत्तम स्वामी– बहुत अच्छा मैसेज नहीं जाता है...नहीं आना होता तो नहीं आना चाहिए था...मना कर देते।
सीएम – ये कल मेरी बात हो गई थी तपन जी से..मेरे ना आने के बारे तपन जी को कल ही बता दिया था...ये आपको कम्यूनिकेट नहीं कर पाए मुझे मालूम नहीं है...लेकिन मेरी अपनी ओर से आज के इस अवसर पर परम पूज्य महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी जी की जयकारा लगाएं सभी लोग...
उत्तम स्वामी – अच्छा नहीं लगा...सच में अच्छा नहीं लगा।
सीएम – अरे महाराज जी हम आपके बच्चे हैं...आपसे तो माफी मांगते रहेंगे...हमें स्वराज के काम में भी तो आपने ही लगाया...अब ये तो आप जानो..आपने आफत फंसे ही तो आप निपटते रहो अब आप खुश रहो या नाराज..ये सब तो आपके सिर पे है...हमको क्या मालूम..आप ही तो आशीर्वाद देते हो आगे बढ़ो..आगे बढ़ो...अब आप आगे बढ़ाओ और भारत माता की जय बोलो...दूसरा किसके पास जाना अपने...मैं महाराज जी से विनम्रता से से निवेदन करूंगा के..मैं आपसे क्षमा भी मांगता हूं...क्योंकि ये बात बिलकुल सही है...मेरे द्वारा अपनी स्वीकृति भी दी...कार्यक्रम भी दिया और कार्यक्रम में हां भी करी...लेकिन हमारे गौतम टेटवाल जी और वो आपके सारे ही मंत्रीगण मौजूद थे...तो मैं ये मानकर चला हूं...और आप नाराज हो या खुश आप सदैव आशीर्वाद देते रहोगे...इस उम्मीद के साथ मैं बात भी कर रहा हूं आपसे...हम सबके लिए सौभाग्य की बात है...आज के इस कार्यक्रम में मां नर्मदा की कृपा हम सब पर बनी रहे...आपका आशीर्वाद बना रहे...और खासकर जिन-जिन को पुरस्कार दिया उन सबका भी सम्मान करते हुए...आज के इस अवसर पर चूकिं मैं अभी थोड़ी देर बाद यहीं से इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थति दर्ज कराने के आधार पर यहां आपके बीच में उपस्थित था...और महाराज जी जिस प्रकार से नर्मदा जी का काम कर रहे हैं...और नर्मदा जी के साथ-साथ सारे सेवा कार्यों में वे सदैव आशीर्वाद देते हैं...शरद पूर्णिमा के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं और बधाई देता हूं...महाराज जी मैंने आपके भाषण भी सुन लिया और आपकी डांट भी सुन ली...और आपकी डांट के आधार पर डबल रोटी खाऊंगा...महाराज जी के आशीर्वाद से आनंद है...महाराज जी कभी नाराज होते ही नहीं...महाराज जी आपको पहली बार नाराज होते देख के मजा आया...कि ऐसा भी तो होना चाहिए घर के अंदर...कि जब तक बड़े बूढ़े नाराज नई होये तो खानई हजम नई होय अपने तो...आज के इस अवसर पर शरद पूर्णिमा है और ऐसा कहते हैं कि रात को अमृत बरसता है...मेरे को तो दिन में अमृत मिल रहा है इसका आनंद आया है..