अंकिता भंडारी के नाम पर उत्तराखंड के श्रीकोट राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नामकरण
उत्तराखंड सरकार ने पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ (श्रीकोट) गांव में स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम बदलकर स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज करने का निर्णय लिया है। यह फैसला राज्य की दिवंगत युवती अंकिता भंडारी की याद में लिया गया है, जिसकी हत्या वर्ष 2022 में हुई थी।
सरकार का आदेश और मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने गुरुवार को कॉलेज का नाम बदलने संबंधी आधिकारिक आदेश जारी किया। इससे एक दिन पहले, बुधवार रात मुख्यमंत्री धामी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी और उन्हें विश्वास दिलाया था कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने परिजनों द्वारा रखी गई मांगों पर विधि-सम्मत, निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि
डोभ गांव की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। वह पौड़ी के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। आरोप के अनुसार, रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों के साथ मिलकर उसे नहर में धक्का दे दिया था।
इस मामले में तीनों दोषियों को सत्र न्यायालय से उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। यह मामला उत्तराखंड में व्यापक सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है।
वीआईपी एंगल और बढ़ती सियासी हलचल
अंकिता हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ से जुड़ी हालिया जानकारी सामने आने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस समेत कई राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग कर रहे हैं और लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
अंकिता के माता-पिता ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात के दौरान उनकी मांगों पर विधि-सम्मत तरीके से कार्रवाई करने का भरोसा दिया।
नामकरण के पीछे संदेश
राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम स्वर्गीय अंकिता भंडारी के नाम पर रखने को सरकार ने उनके प्रति सम्मान और न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। इससे एक ओर जहां अंकिता की स्मृति को संस्थागत स्वरूप मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है।
Gulzar Ahmad