उत्तराखंड सरकार ने स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द की
उत्तराखंड में स्नातक स्तरीय परीक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परीक्षा को रद्द करने का निर्णय किया है। यह फैसला परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद लिया गया। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित इस परीक्षा में लगभग एक लाख पांच हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से पेपर के तीन पेज मोबाइल के माध्यम से बाहर आ गए और सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
छात्रों की मांग और आंदोलन
इस घटना के बाद छात्रों ने परीक्षा को रद्द करने और सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। मुख्यमंत्री धामी ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की और उनकी मांग को स्वीकार करते हुए सीबीआई जांच की घोषणा की। सरकार ने इस मामले में एसआईटी का गठन भी किया और उत्तराखंड उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया।
जांच आयोग की रिपोर्ट
जांच आयोग ने देहरादून, हल्द्वानी समेत कई शहरों में जनसंवाद कर अभ्यर्थियों और शिक्षकों की राय जानी। सभी स्थानों पर हुए जनसंवाद के आधार पर आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट में परीक्षा को रद्द करने की सिफारिश की गई।
भाजपा विधायकों की अपील
भाजपा विधायक प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर परीक्षा को छात्रहित में रद्द करने और इसे दोबारा कराने की मांग की। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए परीक्षा को रद्द करने का निर्णय किया।
सरकार की नीति
मुख्यमंत्री धामी ने इस पूरे मामले में अपनी सरकार की <जीरो टॉलरेंस> नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है और इस दिशा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
नए कदम की उम्मीद
इस फैसले के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि उत्तराखंड सरकार जल्द ही स्नातक स्तरीय परीक्षा के लिए नई तारीखों का ऐलान करेगी। छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षा देने का मौका मिलेगा।