वंदे मातरम् के 150 साल का जश्न

· 1 min read
वंदे मातरम्  के 150 साल का जश्न

वंदे मातरम् के 150 साल पूरे, PM मोदी ने किया समारोह का उद्घाटन

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में एक भव्य समारोह को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने वंदे मातरम् के महत्व और इसके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री का संबोधन

PM मोदी ने अपने भाषण में कहा कि वंदे मातरम् भारत की स्वतंत्रता का उद्घोष था और हर दौर में प्रासंगिक है। उन्होंने 1937 में हुए राष्ट्रगीत के विभाजन को देश के विभाजन का कारण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वंदे मातरम् के मूल रूप में भारत माता को सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में देखा गया है। नया भारत आतंक के विनाश के लिए दुर्गा बन सकता है।

समारोह के मुख्य आकर्षण

प्रधानमंत्री ने समारोह में एक विशेष डाक टिकट और सिक्का जारी किया। इसके साथ ही उन्होंने एक वेबसाइट लॉन्च की और सालभर चलने वाले स्मरण समारोह की शुरुआत की। देशभर में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन भी हुआ।

वंदे मातरम् का इतिहास

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था। यह पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया, जिससे इसका राष्ट्रीय महत्व बढ़ा। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत जनता की आवाज बना और ब्रिटिश शासन के विरोध का प्रतीक बन गया।

राष्ट्रगीत का सम्मान

देश की आजादी के बाद, संविधान सभा ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत घोषित किया और इसे जन गण मन के बराबर सम्मान दिया। इसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

इस समारोह के माध्यम से वंदे मातरम् के ऐतिहासिक योगदान और महत्व को याद किया गया। इसका सालभर चलने वाला कार्यक्रम देश के हर कोने में इसकी गूंज सुनाएगा।

Amit Pateria