यूनेस्को ने दिवाली को अमूर्त विश्व धरोहर में शामिल किया
यूनेस्को ने दिवाली को अमूर्त विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दी है। इस फैसले को भारत की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के लिए एक बड़ा सम्मान माना जा रहा है।
यूनेस्को की नई सूची और दिवाली
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज, यानी अमूर्त विश्व धरोहर की नई सूची जारी की है। इसमें भारत की दिवाली के साथ घाना, जॉर्जिया, कांगो, इथियोपिया और मिस्र सहित कई देशों के सांस्कृतिक प्रतीक शामिल किए गए हैं।
अमूर्त धरोहर की यह सूची उन परंपराओं, आस्थाओं और सांस्कृतिक प्रथाओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से बनाई जाती है, जिन्हें छू तो नहीं सकते, लेकिन अनुभव किया जा सकता है। इसका लक्ष्य इन्हें सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।
पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर संदेश जारी कर दिवाली के सूची में शामिल होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि दिवाली भारत और दुनिया भर के लोगों के लिए संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा त्योहार है, जो हमारी सभ्यता की आत्मा और ज्ञान व धर्म का प्रतीक है।
मोदी ने विश्वास जताया कि यूनेस्को की इस सूची में शामिल होने से दिवाली की वैश्विक लोकप्रियता और भी बढ़ेगी तथा प्रभु श्रीराम के आदर्श लोगों को मार्गदर्शन देते रहेंगे।
भारत की अन्य अमूर्त धरोहरें
फिलहाल भारत की 15 सांस्कृतिक परंपराएं पहले से ही यूनेस्को की अमूर्त विश्व धरोहर सूची में दर्ज हैं। इनमें दुर्गा पूजा, कुंभ मेला, वैदिक मंत्रोच्चार, रामलीला और छाऊ नृत्य जैसी प्रमुख परंपराएं शामिल हैं। दिवाली के जुड़ने से भारत की सांस्कृतिक विविधता और व्यापक रूप से सामने आई है।
दिल्ली में अंतर-सरकारी बैठक और विशेष कार्यक्रम
यूनेस्को की इंटर-गवर्नमेंटल कमेटी फॉर इंटैन्जिबल हेरिटेज की 20वीं बैठक की मेजबानी इस समय दिल्ली कर रही है। यह बैठक 8 से 13 दिसंबर तक चल रही है। इसी मौके को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 10 दिसंबर को विशेष दीपावली समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि दुनिया के सामने भारत की सांस्कृतिक छवि को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया जा सके।
दिल्ली सरकार की तैयारियाँ
दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के अनुसार 10 दिसंबर को दिल्ली सरकार अलग से दिवाली उत्सव मनाएगी। सभी सरकारी इमारतों को रोशनी से सजाया जाएगा, दिल्ली हाट में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और लाल किले पर दीये जलाए जाएंगे। राजधानी को सजाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार को दी गई है।
लाल किला इस समारोह का मुख्य केंद्र होगा, जहां विदेशी मेहमानों और देश के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दीप प्रज्वलन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया जाएगा। पूरे शहर में लाइटें, सजावट, दीये और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से इस उपलब्धि का उत्सव मनाया जाएगा।
दिवाली के संदेश को वैश्विक रूप देना
सरकार की कोशिश है कि दिवाली को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले सार्वभौमिक संदेश के रूप में दुनिया के सामने पेश किया जाए। इस पहल के जरिए यूनेस्को की सूची में भारत की उपस्थिति और मजबूत करने तथा भारतीय संस्कृति की वैश्विक छवि को और व्यापक रूप देने का लक्ष्य रखा गया है।
निष्कर्ष
दिवाली का अमूर्त विश्व धरोहर के रूप में मान्यता पाना भारत के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है। यह कदम न केवल भारतीय परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें संरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दिल्ली में होने वाले विशेष कार्यक्रम इस ऐतिहासिक पल को और यादगार बनाने की कोशिश हैं।
Gulzar Ahmad