यूपी में समय से पहले हो सकते हैं विधानसभा चुनाव: जनगणना स्टाफ की दोहरी ड्यूटी एक बड़ा कारण
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के समय से पहले होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें जनगणना के लिए नियुक्त किए गए पांच लाख से अधिक कर्मचारियों की दोहरी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षाओं से टकराव और आर्थिक मंदी व महंगाई का संभावित असर प्रमुख हैं।
जनगणना और चुनाव ड्यूटी का टकराव
देश में जनगणना का पहला चरण चल रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। इसका दूसरा चरण फरवरी-मार्च 2027 में होना है। उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए 5.25 लाख शिक्षकों और 600 से अधिक एसडीएम/डीएम की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में बूथों की संख्या बढ़कर 1.77 लाख हो चुकी है, जिसके लिए चुनाव ड्यूटी में 7 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि जनगणना और चुनाव के लिए एक ही स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाती है, तो प्रशासनिक व्यवस्था ठप पड़ सकती है। इसलिए, चुनाव आयोग को समय से पहले चुनाव कराने का फैसला लेना पड़ सकता है, ताकि वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण कार्यक्रम पूरा हो सके।
बोर्ड परीक्षाओं और आर्थिक अनिश्चितता का प्रभाव
फरवरी-मार्च के महीने में उत्तर प्रदेश, सीबीएसई और आईसीएसई की बोर्ड परीक्षाएं भी होती हैं, जिसमें लाखों शिक्षक व्यस्त रहते हैं। 2022 में भी विधानसभा चुनाव के बाद बोर्ड परीक्षाएं करवाई गई थीं। इसके अलावा, देश में आर्थिक मंदी और महंगाई को लेकर चिंता जताई जा रही है। वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही में इसका असर जनता पर सीधे दिख सकता है, जिससे सत्ताधारी पार्टी की नाराजगी बढ़ सकती है। ऐसे में, भाजपा मंदी का असर दिखने से पहले चुनाव कराना सुरक्षित मान सकती है।
राजनीतिक दलों की तैयारियां
चुनावी आहट मिलते ही उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दल 'इलेक्शन मोड' में आ गए हैं। भाजपा ने अपने प्रभारी मंत्रियों को जिलों में भेजा है। सपा ने 200 कैंडिडेट तय कर लिए हैं और समय से पहले उनके नाम घोषित करने की तैयारी में है। सुभासपा ने 44 सीटों पर प्रभारी तैनात कर दिए हैं, जो चुनाव लड़ेंगे। बसपा प्रमुख मायावती ने भी लगभग 50 सीटों पर अपने प्रभारियों के नाम फाइनल कर दिए हैं, जिनमें से 5 सार्वजनिक किए गए हैं।
विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा का मानना है कि सरकार विपक्ष को तैयारी का मौका नहीं देना चाहती। जनगणना का दूसरा चरण चुनाव के समय रखना इस बात का संकेत है कि सरकार वक्त से पहले चुनाव चाहती है। वहीं, वीरेंद्रनाथ भट्ट के अनुसार, जनगणना और चुनाव एक साथ कराना प्रशासनिक मशीनरी के लिए बेहद मुश्किल है। महंगाई का असर सरकार की नाकामी नहीं, बल्कि वैश्विक कारणों से है, लेकिन इसका चुनाव पर असर पड़ सकता है, जिससे बचने के लिए सरकार जल्दी चुनाव करा सकती है।
वोटर लिस्ट प्रकाशन से तस्वीर साफ होगी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि यदि जनवरी से पहले चुनाव होते हैं, तो 2025-26 की मतदाता सूची को आधार बनाया जा सकता है। आयोग के पास तैयारियों के लिए पर्याप्त समय है।
Pushpendra Chaubey