76-80 दिन का फ्यूल स्टॉक: तेल कंपनियों को दैनिक ₹700 करोड़ का नुकसान

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76-80 दिन का फ्यूल स्टॉक: तेल कंपनियों को दैनिक ₹700 करोड़ का नुकसान

भारत में 76-80 दिन का फ्यूल स्टॉक, लेकिन तेल कंपनियों को भारी नुकसान

नई दिल्ली: भारत के पास वर्तमान में अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व, रिफाइनरी स्टॉक और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर 76 से 80 दिन की खपत के बराबर फ्यूल रिजर्व मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद देश की तेल सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बहुत लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर नहीं रहेंगी।

वहीं, दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने बताया कि LPG के अलावा तेल कंपनियां वर्तमान में डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर 6 रुपए प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेल रही हैं। इस कारण कंपनियों को हर दिन करीब 600 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

लंबी अवधि के संघर्ष से बदल सकती हैं चुनौतियां

हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्वीकार किया कि यदि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा खींचता है, तो चुनौतियां बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि शॉर्ट-टर्म की रुकावटों को देश अपने स्टॉक और वैकल्पिक रास्तों से संभाल लेगा, लेकिन बहुत लंबे समय तक चलने वाला संकट वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर डाल सकता है। सरकारी तेल कंपनियां लॉन्ग-टर्म सुरक्षा के लिए घरेलू स्तर पर ड्रिलिंग एक्टिविटीज को काफी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं ताकि बाहरी झटकों के प्रति निर्भरता कम हो सके।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर भी 30 दिन का संकट झेलने में सक्षम

वैश्विक तेल सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण रूट 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने की आशंकाओं पर पेट्रोलियम मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भारत के पास मौजूद स्टॉक और वैकल्पिक सोर्सिंग (आपूर्ति) की व्यवस्थाओं के कारण देश किसी भी अस्थायी रुकावट से निपटने में सक्षम है। अगर यह समुद्री रास्ता करीब 30 दिनों के लिए बंद भी हो जाता है, तो भारत इस स्थिति को बेहद आसानी से संभाल सकता है।

क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और LPG का 60 दिनों का मजबूत कवर

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि उनकी प्राथमिकता देश में क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और एलपीजी (LPG) तीनों का कम से कम 60-60 दिनों का स्टॉक कवर बनाए रखने की है। भारत वर्तमान में इस तय सीमा (थ्रेशोल्ड) को पूरा कर रहा है और एक बेहद आरामदायक स्थिति में है। सरकार ने पहले से ही अपनी आपूर्ति व्यवस्था में विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) लाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

मोजाम्बिक और यूएई जैसे देशों से मिलेगी अतिरिक्त मदद

पेट्रोलियम मंत्री के मुताबिक, खाड़ी देशों (गल्फ रीजन) से बाहर के उत्पादक देश वैश्विक स्तर पर तेल की कमी को पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि मोजाम्बिक से आने वाली अतिरिक्त गैस सप्लाई भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करेगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एलपीजी कार्गो सुरक्षित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों के साथ बातचीत की गई है, जिससे भारत को संकट के समय जरूरी मदद मिल सके।

24 रिफाइनरियों की क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत

मंत्री ने कहा कि भारत का एनर्जी सिक्योरिटी फ्रेमवर्क सिर्फ स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिफाइनर्स और फ्यूल रिटेलर्स के पास मौजूद इन्वेंट्री भी शामिल है। देश में वर्तमान में 24 रिफाइनरियां काम कर रही हैं और सरकार लगातार अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ा रही है। वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान यह रिफाइनिंग क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। देश की ऊर्जा कंपनियां भी मानती हैं कि शॉर्ट-टर्म के किसी भी संकट को आसानी से मैनेज किया जा सकता है।

कम कीमत पर रिजर्व न भरने के आरोपों को खारिज किया

महामारी (पैंडेमिक) के बाद जब कच्चे तेल की कीमतें बेहद कम थीं, तब भारत द्वारा अपने रिजर्व को पर्याप्त रूप से न भरने की आलोचनाओं को मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि फ्यूल स्टॉक का मैनेजमेंट एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें लगातार स्टॉक को रिप्लेनिश (दोबारा भरना) और उसका कमर्शियल इस्तेमाल करना शामिल होता है। क्रूड ऑयल को अनिश्चितकाल के लिए सिर्फ स्टोर करके नहीं रखा जा सकता; इन्वेंट्री को बाजार की स्थितियों और खपत की जरूरतों के आधार पर एक्टिव तरीके से मैनेज किया जाता है।

एलपीजी कनेक्शंस 14 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ के पार पहुंचे

देश के बुनियादी ऊर्जा ढांचे (ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने के लिए एलपीजी स्टोरेज क्षमता और घरेलू तेल खोज (एक्सप्लोरेशन) पर खर्च को काफी बढ़ाया गया है। साल 2014 में देश में करीब 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर 33 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं। इसके अलावा अंडमान बेसिन सहित विभिन्न घरेलू एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स में निवेश को तेज किया गया है।

Amit Pateria

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