1.5 करोड़ एलपीजी चोरी: ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक-डायरेक्टर महाराष्ट्र से गिरफ्तार

· 1 min read
1.5 करोड़ एलपीजी चोरी: ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक-डायरेक्टर महाराष्ट्र से गिरफ्तार

1.5 करोड़ की एलपीजी चोरी: ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक-डायरेक्टर गिरफ्तार, 92 टन गैस बेचे जाने का खुलासा

महाजटी में 1.5 करोड़ के एलपीजी घोटाले में दो मुख्य आरोपी महाराष्ट्र से पकड़े गए।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 1.5 करोड़ के एलपीजी घोटाले मामले में दो आरोपी, ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उनके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर, को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया है। वे लंबे समय से फरार चल रहे थे। पुलिस इस मामले के मास्टरमाइंड निलंबित जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर, पेट्रोकेमिकल्स के मैनेजर निखिल वैष्णव और व्यापारी मनीष चौधरी सहित अन्य आरोपियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

घोटाले की प्लानिंग और पैसों का लेन-देन

पुलिस के अनुसार, चोरी कर बेची गई लगभग 92 टन गैस के एवज में करीब 80 लाख रुपए का लेन-देन हुआ था। इसमें से लगभग 50 लाख अजय यादव, 20 लाख पंकज चंद्राकर और 10 लाख मनीष चौधरी को मिले थे। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने पूरे घोटाले की प्लानिंग की थी। एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर ने सौदे और लोगों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई, जबकि व्यापारी मनीष चौधरी ने मध्यस्थता की।

सौदेबाजी और पैसों का बंटवारा

पुलिस के मुताबिक, छह गैस कैप्सूलों में भरी एलपीजी गैस को बेचने के लिए शुरुआत में लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपए की मांग की गई थी। मोलभाव के बाद यह सौदा लगभग 90 लाख रुपए में तय हुआ। पैसों के बंटवारे का भी खाका तैयार था, जिसमें अजय यादव को 50 लाख, पंकज चंद्राकर को 20 लाख और मनीष चौधरी को 20 लाख रुपए मिलने थे। हालांकि, मनीष चौधरी खुद को केवल 10 लाख रुपए मिलने की बात बता रहा था। पैसों का लेन-देन ग्राम परसवानी स्थित पंकज चंद्राकर के कारखाने ‘आस्था ट्राली’ में होता था।

फरार आरोपियों की गिरफ्तारी

फरार आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और सार्थक सिंह ठाकुर पिछले एक महीने से लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे और पुलिस से बचने के लिए मोबाइल नंबर और सिम कार्ड बदल रहे थे। पुलिस ने 11 शहरों के मोबाइल टॉवर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टोल प्लाजा डेटा, बैंकिंग और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन जांच के बाद उन्हें महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया।

पूरा मामला

यह मामला तब सामने आया जब सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में एलपीजी गैस से भरे छह कैप्सूल ट्रकों से गैस चोरी करते हुए आरोपियों को पकड़ा गया था। सुरक्षा कारणों से कैप्सूलों को सिंघोड़ा थाना परिसर में खड़ा कराया गया था, जिसकी जिम्मेदारी खाद्य विभाग को सौंपी गई थी। यहीं से तत्कालीन जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव ने पूरी साजिश रची और गैस कैप्सूलों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सौंप दी गई। सुपुर्दनामा मिलने के बाद गैस कैप्सूलों से एलपीजी निकालकर बेच दिया गया, जिसकी कीमत लगभग 77 लाख रुपए आंकी गई है।

मामले की गंभीरता

पुलिस ने इस पूरे मामले में आपराधिक न्यास भंग, साजिश करना, फर्जीवाड़ा करना, कालाबाजारी और सरकारी संपत्ति का गलत इस्तेमाल समेत कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस को उम्मीद है कि पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

L. N. Bhargava