मानव अधिकार आयोग की सख्ती से 2.53 करोड़ मुआवजा स्वीकृत, जनसुनवाई में लापरवाही उजागर

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मानव अधिकार आयोग की सख्ती से 2.53 करोड़ मुआवजा स्वीकृत, जनसुनवाई में लापरवाही उजागर

मानव अधिकार आयोग की सख्ती के बाद चार जिलों में 2.53 करोड़ के मुआवजे स्वीकृत

मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना जिलों में हुई मानव अधिकार आयोग की जनसुनवाई में सरकारी महकमों की लापरवाही और आम आदमी की समस्याओं का खुलासा हुआ। पन्ना में एक महिला ने वन विभाग के गार्ड द्वारा उत्पीड़न और पुलिस द्वारा सुनवाई न करने की शिकायत की। आरोपी अधिकारी पर कार्रवाई के बजाय पीड़िता के पति को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी जा रही थी। इस मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद डीआईजी को हस्तक्षेप करना पड़ा।

शिक्षा और पीएचई विभाग की लापरवाही

पन्ना-छतरपुर में शिक्षा और पीएचई विभाग की एक और लापरवाही सामने आई, जहां स्कूल परिसर में पानी की टंकी तो बनवा दी गई, ठेकेदार का भुगतान भी हो गया, लेकिन स्कूल तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नहीं जोड़ी गई।

six साल से लटकी पेंशन

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एक बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी पेंशन के लिए छह साल से चक्कर लगा रहा है, जबकि नियमानुसार यह काम एक महीने में पूरा हो जाना चाहिए था। आयोग ने इस देरी पर सवाल उठाया।

तेंदुए के हमले से मौत, मुआवजा दबाया

एक मामले में तेंदुए के हमले से पोते की जान चली गई, लेकिन मुआवजे की फाइल दबा दी गई। आयोग की पूछताछ के बाद कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लिया और आनन-फानन में 2 करोड़ 53 लाख रुपए का मुआवजा स्वीकृत कराया।

मानव अधिकार आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष एपी सिंह ने कहा कि मानव अधिकारों के संरक्षण का प्राथमिक दायित्व शासन और प्रशासन का है। जिलों में शिकायतों का निराकरण न होने पर ही मामले आयोग तक आते हैं। दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय की जाएगी।

Sachin Saxena