देश के 1 लाख स्कूलों में सिर्फ 1 शिक्षक
शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में 1,04,125 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। इन स्कूलों में करीब 33,76,769 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर स्कूल में 34 छात्र-छात्राओं के लिए केवल एक शिक्षक उपलब्ध है। यह संख्या शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों से कम है, जिसके अनुसार प्राथमिक स्तर पर 30 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए।
आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थिति गंभीर
रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में ऐसे स्कूलों की संख्या सबसे अधिक है, जबकि उत्तर प्रदेश में ऐसे छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि, मंत्रालय का डेटा बताता है कि पिछले कुछ वर्षों में इन स्कूलों की संख्या में कमी आई है। 2022 में यह संख्या 1,18,190 थी, जो 2023 में घटकर 1,10,971 और अब 2024-25 में 1,04,125 हो गई है।
महिला शिक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि देश में शिक्षकों की संख्या पहली बार 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। 2023-24 में कुल शिक्षक 98.83 लाख थे, जो 2024-25 में बढ़कर 1 करोड़ 1 लाख 22 हजार हो गए हैं। इसमें महिला शिक्षकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में जहां महिला शिक्षक 40.16 लाख थीं, वहीं 2024-25 में यह संख्या 54.81 लाख हो गई है।
शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार
देश में औसत शिक्षक-छात्र अनुपात अब 21 छात्रों पर एक शिक्षक का हो गया है, जो पहले 31 छात्रों पर एक शिक्षक था। हालांकि, झारखंड में स्थिति अभी भी चिंताजनक है, जहां एक शिक्षक के पास औसतन 47 छात्र हैं, जबकि सिक्किम में यह संख्या केवल 7 है।
यह रिपोर्ट देश में शिक्षा के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों और प्रगति की झलक पेश करती है।