आगरा में UGC नियमों के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प
आगरा में सवर्ण समाज और करणी सेना के लगभग 300 कार्यकर्ताओं ने UGC के नए नियमों के विरोध में रैली निकालकर SDM कार्यालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए। पहले बहस हुई फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। स्थिति बिगड़ने पर इंस्पेक्टर जान बचाने के लिए वकीलों के चैंबर में घुस गए और पुलिस ने चैंबर का गेट बंद कर दिया। हालात संभालने के लिए आसपास के थानों से अतिरिक्त फोर्स बुलानी पड़ी।
लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शनकारी आगरा-कानपुर नेशनल हाईवे पर धरने पर बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। इससे हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने समझाने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक संबंधित इंस्पेक्टर को नहीं हटाया जाता, वे धरने से नहीं उठेंगे। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन देकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। करणी सेना के जिलाध्यक्ष ने इंस्पेक्टर पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों के आरोप और मांगें
सिस्टम सुधार संगठन के सदस्य अंशुमान ठाकुर ने बताया कि UGC का नया मसौदा विश्वविद्यालयों में सामाजिक और संवैधानिक न्याय के सिद्धांतों को प्रभावित करेगा। प्रस्तावित व्यवस्था में बनने वाली समितियों में वंचित वर्गों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं है, जिससे छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील मुख्यालय पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने उनके साथ अभद्रता की और लाठीचार्ज किया। इसके विरोध में ज्ञापन कार्यक्रम को धरने में बदल दिया गया और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया। अंशुमान ठाकुर ने कहा कि UGC के नए नियमों के खिलाफ उनकी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि अब इसकी शुरुआत हुई है। जल्द ही साथियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
सवर्ण समाज के नेता गजेंद्र परमार ने कहा कि ज्ञापन देने के दौरान पुलिसकर्मियों का व्यवहार बेहद आपत्तिजनक और अशोभनीय रहा। विरोध करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संबंधित पुलिसकर्मी को सस्पेंड नहीं किया गया तो सवर्ण समाज के लोग आंदोलन तेज करेंगे और आगरा के कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
UGC के नए नियम और विरोध के कारण
UGC ने 13 जनवरी, 2026 को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था, जिसका नाम 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026' है। इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि आलोचकों का कहना है कि नए नियमों से सवर्ण छात्र 'स्वाभाविक अपराधी' बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।
Arvind Vishwakarma