आई-पैक डायरेक्टर प्रतीक जैन पर ED रेड, ममता बनर्जी ने कार्रवाई को राजनीतिक बताया

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आई-पैक डायरेक्टर प्रतीक जैन पर ED रेड, ममता बनर्जी ने कार्रवाई को राजनीतिक बताया

आई-पैक निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, ममता बनर्जी ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयला ‘घोटाले’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चुनावी परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई।

सुबह-सुबह कोलकाता में आई-पैक दफ्तर पर छापा

ईडी की टीम गुरुवार सुबह करीब सात बजे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में कोलकाता के साल्ट लेक सेक्टर-V स्थित गोदरेज वाटर साइड बिल्डिंग में आई-पैक के कार्यालय पहुंची और तलाशी शुरू की। इसी के साथ कुल लगभग 10 परिसरों पर रेड की गई, जिनमें साल्ट लेक स्थित दफ्तर, कोलकाता की लाउडन स्ट्रीट पर स्थित प्रतीक जैन का घर और चार परिसरों सहित कुछ ठिकाने दिल्ली में भी शामिल बताए गए।

ममता बनर्जी खुद पहुंचीं छापे की जगह

ईडी की कार्रवाई शुरू होने के कुछ ही समय बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अपने आधिकारिक काफिले के साथ आई-पैक के दफ्तर और प्रतीक जैन के आवास पहुंच गईं। उन्होंने मौके पर ईडी अधिकारियों से बात की और एजेंसी की मंशा पर कड़े सवाल उठाए। बनर्जी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित और असंवैधानिक बताया।

कौन हैं प्रतीक जैन?

प्रतीक जैन आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग व मटीरियल साइंस में डिग्री हासिल की है। पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक्सिस म्यूचुअल फंड में इंटर्नशिप की। वर्ष 2012 में उन्होंने डेलॉइट में एनालिस्ट के तौर पर काम किया। इसके बाद वे ‘सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस’ के संस्थापक सदस्य बने, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है और बाद में यही संगठन आई-पैक में बदल गया।

प्रतीक जैन आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक हैं और उन्हें भी प्रशांत किशोर की तरह चुनावी रणनीति का विशेषज्ञ माना जाता है। प्रशांत किशोर के आई-पैक से अलग होने के बाद ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन कंपनी के निदेशक बने। जैन पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं।

ईडी का आरोप: कोयला व्यापार से जुड़े लाभार्थी

ईडी अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कोयला ‘घोटाले’ से जुड़े कुछ हवाला और नकद लेनदेन के संबंध में प्रतीक जैन के खिलाफ विशिष्ट साक्ष्य मिले हैं, जिस आधार पर तलाशी ली जा रही है। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें आसनसोल और आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स की खदानों से कई करोड़ रुपये के कोयले की चोरी के आरोप लगाए गए थे। स्थानीय कोयला व्यापारी अनूप मांझी उर्फ लाला इस मामले में मुख्य संदिग्ध है।

ईडी ने इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सांसद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की थी। एजेंसी का दावा है कि अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त धन के वे लाभार्थी हैं। मौजूदा छापेमारी के दौरान अधिकारी विशिष्ट कंप्यूटर उपकरण और दस्तावेज जब्त कर रहे हैं।

ममता बनर्जी के गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईडी ने उनके आईटी प्रमुख के घर पर छापा मारकर पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त किए, जिनमें विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की जानकारी भी शामिल है। बनर्जी के अनुसार उन्होंने वहां से अपनी पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क वापस ले लिए।

उन्होंने ईडी पर यह भी आरोप लगाया कि एजेंसी उनकी पार्टी की हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, उम्मीदवारों की सूची और आंतरिक रणनीति से जुड़े कागजात ले जाने की कोशिश कर रही थी। ममता ने सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक दल का डेटा इकट्ठा करना क्या ईडी के अधिकार क्षेत्र में आता है।

ईडी की सफाई: राजनीतिक कोण से इनकार

ईडी सूत्रों ने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कोयला घोटाला मामले और उससे जुड़े अपराध से अर्जित आय की जांच के आधार पर की गई है और इसका किसी तरह का राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। एजेंसी के अनुसार, प्रतीक जैन और कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता दिखाने वाले विशिष्ट साक्ष्यों के आधार पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

आई-पैक और तृणमूल कांग्रेस की पृष्ठभूमि

आई-पैक की स्थापना वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी। बाद में उन्होंने ‘जन सुराज’ नामक राजनीतिक दल बनाया, जिसे हाल के बिहार विधानसभा चुनावों में कोई सफलता नहीं मिली।

आई-पैक ने 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम किया। 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की बड़ी जीत का श्रेय भी बड़े पैमाने पर आई-पैक की रणनीति को दिया जाता है। आई-पैक की वेबसाइट पर तृणमूल और राज्य सरकार के लिए 2021 के चुनावों के दौरान किए गए कार्यों को ‘दीदी-आर 10 ओंगीकर’ शीर्षक के तहत साझा किया गया है। वेबसाइट के अनुसार, फर्म ऐसे ‘दूरदर्शी’ नेताओं के साथ काम करती है जिनका काम करने का रिकॉर्ड सिद्ध माना जाता है।

निष्कर्ष

कोयला घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में हुई इस छापेमारी ने चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। जहां ईडी अपनी कार्रवाई को कानूनी दायरे में बताते हुए किसी राजनीतिक पहलू से इंकार कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे विपक्ष द्वारा प्रेरित और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बता रही हैं। आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले का राजनीतिक और कानूनी असर किस रूप में सामने आता है।

Amit Pateria